इंदौर में संचालित हो रही बाइक टैक्सी सेवाओं को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। एक लॉ स्टूडेंट द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों से जवाब तलब किया है।
इंदौर
याचिका में आरोप लगाया गया है कि शहर में कई निजी ऐप आधारित कंपनियां बिना स्पष्ट नियमों और आवश्यक अनुमति के बाइक टैक्सी सेवाएं चला रही हैं, जिससे यातायात नियमों और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर चिंता जताई कि यदि बाइक टैक्सी संचालन के लिए स्पष्ट नीति और सुरक्षा मानक तय नहीं हैं, तो यात्रियों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी। कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि क्या इस सेवा के लिए कोई आधिकारिक नियम या दिशा-निर्देश बनाए गए हैं और यदि नहीं, तो इस पर क्या कार्रवाई की जा रही है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि बिना उचित लाइसेंस और नियमन के बाइक टैक्सी चलने से सड़क सुरक्षा के साथ-साथ परिवहन नियमों का भी उल्लंघन हो रहा है। वहीं प्रशासन की ओर से अदालत को बताया गया कि इस मामले में नीति बनाने और नियम तय करने की प्रक्रिया पर विचार किया जा रहा है।
हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों को विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई में सरकार को बाइक टैक्सी सेवाओं की वैधता और नियमों को लेकर स्पष्ट स्थिति बतानी होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में हाईकोर्ट का फैसला आने वाले समय में पूरे राज्य में बाइक टैक्सी सेवाओं के संचालन पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है।
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