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Friday, February 27, 2026

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मझौली की दंत सेवाओं पर उठे गंभीर सवाल

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मझौली में दंत चिकित्सा सेवाओं को लेकर दायर सूचना का अधिकार (RTI) आवेदन के जवाब ने नए विवाद को जन्म दे दिया है।

मझौली जबलपुर 

आवेदक शिवम साहू द्वारा वर्ष 2020 से 2025 के बीच दंत उपचार, डेंटल इम्प्लांट और संभावित अनियमितताओं संबंधी जानकारी मांगी गई थी, लेकिन प्राप्त उत्तर को लेकर अब पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

आंकड़ों में असंगति, वर्षों का अभाव कार्यालय से जारी पत्र क्रमांक क्र./लेखा./2026/2342 दिनांक 26/02/26 में जो आंकड़े दिए गए, वे वर्ष 2023 से आगे के हैं, जबकि आरटीआई में स्पष्ट रूप से 2020 से 2025 तक की वर्षवार जानकारी मांगी गई थी। 2020, 2021 और 2022 का कोई विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया। जानकारों का कहना है कि यह अधूरी जानकारी आरटीआई अधिनियम की भावना के विपरीत है।

जवाब में स्पष्ट किया गया है कि अस्पताल में डेंटल इम्प्लांट की सुविधा उपलब्ध नहीं है और किसी निजी क्लिनिक से कोई अनुबंध भी नहीं है। लेकिन स्थानीय स्तर पर लंबे समय से यह आरोप लगते रहे हैं कि मरीजों को निजी संस्थानों की ओर मार्गदर्शित किया जाता है। यदि कोई औपचारिक रिफरल व्यवस्था नहीं है, तो मरीजों को किस आधार पर और किसके निर्देश पर बाहर भेजा जाता है—यह सवाल अब भी अनुत्तरित है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि दंत विभाग को वर्ष 2023 से अब तक कोई शासकीय बजट/अनुदान प्राप्त नहीं हुआ और न ही उपकरण क्रय किए गए। वर्ष 2025-26 में विधायक की अनुशंसा पर बैंक ऑफ इंडिया सिहोरा द्वारा डेंटल यूनिट उपलब्ध कराए जाने का उल्लेख है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि बिना बजट और उपकरणों के हजारों मरीजों का उपचार किस संसाधन से हुआ?

पत्र में यह भी कहा गया है कि विगत 5 वर्षों में दंत सेवाओं को लेकर कोई शिकायत, जांच या ऑडिट नहीं हुआ। जबकि क्षेत्र में अपूर्ण सेवाओं और पारदर्शिता की कमी को लेकर चर्चा होती रही है। यदि शिकायतें थीं, तो उनका रिकॉर्ड क्यों नहीं? और यदि नहीं थीं, तो असंतोष की आवाजें किस आधार पर उठ रही हैं?

स्वास्थ्य सेवाएं सीधे जनहित से जुड़ी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि— 2020 से 2022 तक के अभिलेख सार्वजनिक किए जाएं,

 ओपीडी रजिस्टर और उपस्थिति रिकार्ड की स्वतंत्र जांच हो,

और यदि सूचना अधूरी या भ्रामक पाई जाती है तो RTI अधिनियम की धारा 20 के तहत दंडात्मक कार्रवाई पर विचार किया जाए।

अब निगाहें जिला स्वास्थ्य प्रशासन पर हैं कि क्या इस मामले में विस्तृत और पारदर्शी स्पष्टीकरण जारी किया जाएगा या यह प्रकरण भी “निरंक” जवाबों की फाइलों में दबकर रह जाएगा।

मझौली क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता दांव पर है—और जनता अब स्पष्ट, प्रमाणित और पूर्ण जवाब चाहती है।

सुंदरलाल बर्मन
सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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