राजधानी में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान नेतागिरी का खामियाजा जनप्रतिनिधि प्रतिमा बागरी को भुगतना पड़ा।
भोपाल
मुख्यमंत्री ने एक अमानक सड़क के निरीक्षण को लेकर उन्हें सार्वजनिक रूप से कड़ी फटकार लगाई। सीएम ने दो टूक सवाल किया—जब सड़क को विभाग पहले ही अमानक घोषित कर चुका था, तो फिर निरीक्षण के नाम पर मौके पर जाने की जरूरत क्या थी?
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे निरीक्षण केवल “राजनीतिक दिखावे” बनकर रह जाते हैं, जबकि ज़मीनी कार्रवाई फाइलों और जवाबदेही से तय होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमानक निर्माण पर कार्रवाई निरीक्षण से नहीं, बल्कि ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कदम उठाने से होती है।
सीएम की इस नाराजगी को प्रशासनिक हलकों में कड़ा संदेश माना जा रहा है कि अब केवल फोटो खिंचवाने की राजनीति नहीं चलेगी। जनता के पैसे से बनी सड़कों की गुणवत्ता पर समझौता करने वालों के खिलाफ सीधी कार्रवाई होगी—चाहे वे अधिकारी हों या जनप्रतिनिधि।




