ऋतुओं और प्रकृति में होने वाले बदलाव की शुरुआत का प्रतीक है भारतीय नव वर्ष – लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह

भारतीय नववर्ष की शुरुआत पर की गई भगवान सूर्य की उपासना

जबलपुर

सृष्टि के आरंभ दिवस और भारतीय नव वर्ष विक्रम संवत 2082 की शुरुआत पर आज यहाँ गोल बाजार स्थित शहीद स्मारक प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम में भगवान सूर्य की उपासना की गई और पूरे विधि विधान से सृष्टि के रचियता भगवान ब्रह्मा के प्रतीक ब्रह्मध्वज को स्थापित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह ने भगवान सूर्य के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर श्री सिंह ने अपने संबोधन में प्रदेश वासियों को भारतीय नव वर्ष की बधाई दी और इसकी शुरुआत एक नए चिंतन के साथ देश हित और प्रदेश हित में करने की अपेक्षा की।

कार्यक्रम में विधायक श्री अजय विश्नोई एवं श्री अशोक रोहाणी, गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया के स्वतंत्र निदेशक और प्रदेश भाजपा के कोषाध्यक्ष श्री अखिलेश जैन, समाजसेवी और मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष, डॉ जीतेन्द्र जामदार, माध्यमिक शिक्षा मंडल के उपाध्यक्ष श्री श्रीनिवास राव, संभागायुक्त अभय वर्मा, कलेक्टर दीपक सक्सेना, नगर निगम आयुक्त श्रीमती प्रीति यादव, अपर कलेक्टर सुश्री मिशा सिंह एवं नाथूराम गोंड, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी तथा भी मौजूद थे।

लोक निर्माण मंत्री श्री सिंह ने कार्यक्रम को संबोधित करते आगे कहा कि भारतीय नव वर्ष की शुरुआत को हमारे ऋषि-मुनियों और पूर्वजों ने सृष्टि का आरंभ दिवस बताया है। यह केवल काल और समय की गणना तथा धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं है, बल्कि प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाने का हमारे ऋषि-मुनियों ने जो मार्ग प्रशस्त किया था उस पर आगे बढ़ने का प्रतीक है।

लोक निर्माण मंत्री श्री सिंह ने भगवान सूर्य की उपासना के महत्व को रेखांकित करते हुये कहा कि सूर्य देवता जीवन दाता है, वे हमें ऊर्जा और प्रकाश देते हैं। जहाँ-जहाँ भी जीवन है भगवान सूर्य की कृपा के बगैर उसकी निरंतरता संभव नहीं है। हम उन्हीं की वजह से विद्यमान है और इसीलिये सूर्य की उपासना कर उनके कृतज्ञता ज्ञापित करते हैं।

लोक निर्माण मंत्री ने भारत के नव वर्ष को ऋतुओं में बदलाव एवं प्रकृति में होने वाले परिवर्तनों का मानव जीवन पर पड़ने वाले असर का अच्छा उदाहरण भी बताया। उन्होंने कहा कि इन परिवर्तनों का सूर्य की उपासना और पूजन पद्धति के माध्यम से किस तरह लाभ उठाया जा सकता है इसकी राह भी हमारे प्राचीन ग्रन्थों ने दिखाई है।

श्री सिंह ने कहा कि जब विक्रम संवत की बात आती है तो सम्राट विक्रमादित्य हम सभी की स्मृति में आते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण के बाद यदि किसी ने पृथ्वी पर न्यायप्रियता और धर्मध्वजा फहराते हुये शासन किया है तो वह सम्राट विक्रमादित्य ही थे। उन्हीं के राज्यारोहण के साथ विक्रम संवत की शुरुआत हुई। श्री सिंह ने कहा कि भारत को विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यता बताते हुये कहा कि पहले हम प्राचीन ग्रन्थों के माध्यम से यह कहते थे और बताने का प्रयास करते थे लेकिन अब जितनी भी नई-नई खोज सामने आ रही है उनमें भारत ही विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यता के रूप में सामने आ रहा है। आज समूचा विश्व वैज्ञानिक आधारों पर यह स्वीकार कर रहा है कि भारत ही सबसे प्राचीन सभ्यता है, साथ ही यह भी मान रहा है कि हमारी हर पूजा पद्धति के पीछे कोई न कोई वैज्ञानिक आधार है।

लोक निर्माण मंत्री श्री सिंह ने अपने संबोधन में भारतीय नव वर्ष की शुरुआत पर विक्रमोत्सव और भगवान सूर्य की उपासना के कार्यक्रम के आयोजन के लिये मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के प्रति आभार भी व्यक्त किया। प्रदेश के नागरिकों को भारतीय नव वर्ष के चैत्र नवरात्र की शुभकामनाएं भी दी। उन्होंने आशा व्यक्त की की मां आदि शक्ति की कृपा और भगवान सूर्य का आशीर्वाद सभी पर बना रहे।

कार्यक्रम को मुख्य वक्ता ट्रिपल आई टीडीएम के निदेशक श्री भारतेंदु ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वैश्विक नववर्ष विक्रम संवत को राष्ट्रीय पंचांग के रूप में पुरातन काल से स्वीकार किया जा रहा है। यह भारत के प्रतापी राजा सम्राट विक्रमादित्य की महाविजय एवं राष्ट्रीय गौरव की पुर्नस्थापना का कालजयी अभिनंदन है। भारतीय समाज द्वारा आज भी विभिन्न पर्वों एवं मांगलिक कार्यों की गणना विक्रम संवत के आधार पर ही की जाती हैं। उन्होंने मैकाले शिक्षा पद्धति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसके माध्यम से अंग्रेजों द्वारा सुनियोजित ढंग से भारत की महान परंपराओं को खंडित करने का कुटिल प्रयास किया गया। जिसमें फंसकर समाज अपनी पौराणिक और वैज्ञानिक कालगणना विक्रम संवत को भूलकर ग्रिगेरियन कलेंडर को अधिक महत्व देने लगा। उन्होंने कहा कि खगोल विज्ञान के क्षेत्र में भारत के महान खगोलीय वैज्ञानिक वराह मिहिर का योगदान अहम हैं। वराह मिहिर द्वारा खगोल विज्ञान के क्षेत्र में किए गए कार्यों को पाश्चात्य देशों द्वारा भी स्वीकार्य किया जाता है। देश में काल गणना के लिए विभिन्न स्थलों पर स्थापित किए गए उपकरण भारतीय खगोल विज्ञान की समृद्धता को प्रदर्शित करते हैं। इस अवसर पर श्री भारतेंदु ने सभी से विक्रम संवत की पौराणिक और वैज्ञानिक विशेषताओं को समझकर इसे अपने जीवन में आत्मसात करने का आवाहन भी किया।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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