शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार का एक सनसनीखेज और शर्मनाक खेल सामने आया है, जहां कागजों में निर्माण और हकीकत में लूट का खुला खेल खेला गया।
मैहर
लघु निर्माण कार्यों की आड़ में अधिकारियों और निजी फर्मों की मिलीभगत से करीब ₹4.25 करोड़ रुपये का गबन कर लिया गया। जांच में घोटाले की पुष्टि होते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि स्कूलों में कराए गए निर्माण कार्य या तो अधूरे थे या कई जगह हुए ही नहीं, लेकिन भुगतान पूरा निकाल लिया गया। इस संगठित लूट में विभागीय अधिकारियों के साथ-साथ तीन निजी फर्मों की सीधी संलिप्तता पाई गई है। कार्रवाई करते हुए 9 अधिकारियों/कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है, वहीं घोटाले में शामिल तीनों फर्मों के बैंक खाते सील कर दिए गए हैं।
प्रशासन ने मामले में पुलिस कार्रवाई शुरू कर दी है और संकेत हैं कि आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। यह घोटाला न केवल सरकारी धन की लूट है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था पर सीधा हमला भी है। अब सवाल यह है—क्या दोषियों तक कार्रवाई पहुंचेगी या फाइलों में ही सिमट जाएगी सच्चाई?




