सरकारी नियम तय करते हैं डिलीवरी चार्ज, फिर भी उपभोक्ताओं से वसूली के आरोप — सच्चाई क्या है?
जबलपुर/भोपाल
घरेलू गैस सिलेंडर की होम डिलीवरी को लेकर आम उपभोक्ताओं के बीच लंबे समय से एक सवाल बना हुआ है—आखिर डिलीवरी करने वाले हॉकर को कितना भुगतान मिलता है और क्यों कई बार उपभोक्ताओं से अतिरिक्त पैसे की मांग की जाती है? इस पूरे मुद्दे की पड़ताल में कई अहम तथ्य सामने आए हैं।
जानकारी के अनुसार, 14.2 किलोग्राम के घरेलू गैस सिलेंडर पर सरकार और तेल कंपनियों द्वारा वितरक कमीशन तय किया जाता है। अक्टूबर 2023 में संशोधित दरों के मुताबिक, प्रति सिलेंडर कुल वितरक कमीशन लगभग ₹73.08 निर्धारित है। इसमें से करीब ₹33.43 राशि केवल डिलीवरी चार्ज के रूप में शामिल होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस ₹33 के डिलीवरी चार्ज में से हॉकर (डिलीवरी मैन) को एजेंसी मालिक द्वारा भुगतान किया जाता है। आमतौर पर यह राशि ₹15 से ₹25 प्रति सिलेंडर के बीच होती है, जो शहर, एजेंसी और अनुबंध के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।
सरकारी नियम स्पष्ट कहते हैं कि यदि उपभोक्ता का घर गैस गोदाम से 5 किलोमीटर के दायरे में है, तो डिलीवरी के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए, क्योंकि यह पहले से ही सिलेंडर की कीमत में शामिल होता है।
यदि उपभोक्ता अपनी सुविधा के अनुसार किसी विशेष समय पर डिलीवरी चाहता है, तो कंपनियां ₹25 से ₹50 तक अतिरिक्त शुल्क ले सकती हैं। हालांकि, इसका एक हिस्सा हॉकर को मिलना तय है।
यदि कोई उपभोक्ता स्वयं गैस गोदाम से सिलेंडर लेकर आता है, तो उसे बिल में शामिल डिलीवरी चार्ज (करीब ₹33.43) की छूट मिलनी चाहिए।
कई मामलों में हॉकर द्वारा “बख्शिश” या अतिरिक्त पैसे की मांग की शिकायतें सामने आती हैं, लेकिन नियमों के अनुसार उपभोक्ता को बिल में दर्ज राशि से एक रुपया भी ज्यादा देने की बाध्यता नहीं है। हॉकर का वेतन या कमीशन देना पूरी तरह गैस एजेंसी संचालक की जिम्मेदारी है।
गैस डिलीवरी से जुड़ा यह पूरा मामला उपभोक्ता अधिकारों और पारदर्शिता से सीधे जुड़ा है। जरूरत है कि उपभोक्ता जागरूक रहें और नियमों की जानकारी रखते हुए किसी भी प्रकार की अनावश्यक वसूली का विरोध करें
— मझौली दर्पण न्यूज




