मध्यप्रदेश के अनूपपुर से सामने आई यह तस्वीर किसी सनसनी की नहीं, बल्कि सिस्टम की निष्ठुरता का जीवंत प्रमाण है।
अनूपपुर (मध्यप्रदेश)
भ्रष्टाचार के खिलाफ वर्षों से लड़ रहे मुकेश ने जब न्याय की हर उम्मीद टूटते देखी, तो विरोध का ऐसा तरीका चुना जिसने पूरे प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया।
सैकड़ों पुरानी शिकायतों और आवेदनों की माला गले में डालकर, निर्वस्त्र होकर तपती ज़मीन पर घिसटते हुए** जब मुकेश कलेक्टर कार्यालय पहुँचा, तो वह दृश्य हर संवेदनशील इंसान को झकझोर देने वाला था। मुकेश का आरोप है कि गांव में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ उसने अनगिनत आवेदन दिए, लेकिन अफसरशाही की नींद नहीं टूटी।
यह सिर्फ एक व्यक्ति का प्रदर्शन नहीं, बल्कि उस आम आदमी की चीख है जिसे फाइलों के बोझ तले कुचल दिया गया। सवाल सीधा है—क्या न्याय पाने के लिए इंसान को खुद को अपमानित करना पड़ेगा? और सबसे बड़ा सवाल—आखिर कब जागेगा प्रशासन?




