नगर परिषद मझौली में विकास नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की नालियां बह रही हैं।
मझौली जबलपुर
वार्ड नंबर 03 में पानी की टंकी से मो. असगर के मकान तक नाली निर्माण आज तक नहीं हुआ, जबकि स्थानीय लोग पिछले पांच वर्षों से लगातार आवेदन और गुहार लगा रहे हैं। नाली न होने से घरों का गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है, जिससे बीमारी और संक्रमण का खतरा बना हुआ है, लेकिन नगर परिषद आंख मूंदे बैठी है।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि वार्ड नंबर 01 में मुन्नी बी के घर से पानी की टंकी होते हुए नासिर के घर तक समतलीकरण और नाली निर्माण के लिए स्वीकृत 10 लाख रुपये की राशि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। जमीन पर काम न के बराबर हुआ, लेकिन कागजों में पूरा भुगतान दिखा दिया गया। न समतलीकरण दिखता है, न पक्की नाली—सिर्फ गड्ढे, कीचड़ और बदबू।
वार्डवासी राहुल काछी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा—
“अगर 10 लाख खर्च हो चुके हैं तो नाली कहां है? यह खुला घोटाला है। अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत के बिना ऐसा संभव नहीं।”
मो. हनीफ का कहना है—
“हर बार सिर्फ आश्वासन मिलता है। अब सब्र टूट रहा है।
सहमति पत्र, आवेदन और शिकायत—सब मौजूद हैं, फिर भी काम शून्य। सवाल सीधा है—
क्या नगर परिषद मझौली में विकास योजनाएं सिर्फ लूट का जरिया बन चुकी हैं?
अब निगाहें कलेक्टर और लोकायुक्त पर हैं कि वे इस 10 लाख के कथित घोटाले पर कब कार्रवाई करते हैं, या फिर यह मामला भी फाइलों में दफन कर दिया जाएगा।




