प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने जिले में संचालित राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत आज मंगलवार को कृषि विज्ञान केंद्र जबलपुर में कृषि सखियों के द्वितीय चरण का प्रशिक्षण प्रारंभ हुआ।
जबलपुर
पाँच दिनों के इस प्रशिक्षण में जिले के विभिन्न हिस्सों से चयनित 40 कृषि सखियां शामिल हो रही हैं। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत जबलपुर जिले में मास्टर ट्रेनर के रूप में 80 कृषि सखियों का चयन किया गया है। इनमें से 40 कृषि सखियों को पूर्व में प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
कृषि सखियों के प्रशिक्षण के शुभारंभ पर परियोजना संचालक आत्मा सह उप संचालक कृषि डॉ एस के निगम ने भारत सरकार की इस योजना का परिचय देते हुये बताया कि कृषि में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को देखते हुये प्राकृतिक खेती में क्लस्टरों का चयन करने के साथ ही मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण हेतु कृषि सखियों का चयन भारत सरकार की महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती निश्चित रूप से सफलता के नये आयाम अर्जित करेगी।
कृषि विज्ञान केंद्र की प्रमुख डॉ रश्मि शुक्ला ने अपने उद्बोधन में रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के प्रयोग से मृदा स्वास्थ्य, मानव स्वास्थ्य, फसल उत्पादन एवं पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव से अवगत कराया। उप परियोजना संचालक आत्मा श्रीमती नविता उरकुड़े ने प्राकृतिक खेती के परिदृश्य के बारे में विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला एवं कृषि सखी के दायित्व एवं कार्यों के बारे में जानकारी दी।
प्रशिक्षण के तकनीकी सत्र में कृषि वैज्ञानिक डॉ डी के सिंह ने बताया कि जिले में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के फलस्वरूप प्राकृतिक खेती अपनाने वाले कृषकों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। कृषि महाविद्यालय के डॉ एस बी अग्रवाल ने प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों के बारे में विस्तारपूर्वक चर्चा की तथा रासायनिक खेती के दुष्परिणाम बताये। तकनीकी सत्र के दौरान डॉ ऋचा सिंह एवं डॉ अक्षता तोमर ने प्राकृतिक खेती का उद्यानिकी फसलों में महत्व एवं प्रबंधन के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी।
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र जबलपुर के वैज्ञानिक डॉ नीलू विश्वकर्मा, डॉ निहारिका शुक्ला, डॉ पूजा चतुर्वेदी, आत्मा परियोजना के रोहित गुप्ता, राजू दोहरे, रीता पाण्डे आदि मौजूद रहे।




