देवउठनी ग्यारस से प्रारम्भ होते है विवाह आयोजन, प्रशासन भी हुआ अलर्ट
जबलपुर
देवउठनी ग्यारस से विवाह और सामूहिक विवाह के आयोजन शुरू हो जाते है जिसमें बाल विवाह होने की संभावना अधिक होती है। जिला प्रशासन भी इस तरह की गतिविधि रोकने नियंत्रण के लिए सतर्क हो गया है। प्रशासन द्वारा बाल विवाह के प्रकरणों पर नियंत्रण के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किया है। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 की धारा 15 के अनुसार बाल विवाह संज्ञेय व गैर-जमानतीय अपराध है। अधिनियम के अनुसार अब बाल विवाह करने-कराने व शामिल होने, इसमें सहयोग व प्रेरित करने वाले, परिवारजन एवं सेवा प्रदाता जैसे (प्रिन्टिग प्रेस, हलवाई, केटरर, धर्मगुरू, समाज के मुखिया, वैण्ड वाला, घोड़े वाला, ब्यूटी पार्लर, टेन्ट हाउस, ट्रांसपोर्ट) व अन्य सभी दोषियों को बाल विवाह अधिनियम, 2008 की धारा 15 के अनुसार 2 वर्ष का कठोर करावास एवं एक लाख रूपये के जुर्माना अथवा दोनों प्रकार से दण्ड का प्रावधान है। इस तरह के अपराध को रोकने के लिए जबलपुर संभाग के बालाघाट जिला कलेक्टर श्री मृणाल मीना एवं जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक सराफ के मार्गदर्शन में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा बाल विवाह की रोकथाम के लिए सघन अभियान चलाया जाकर व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।
देवउठनी ग्यारस जैसे त्यौहार को बाल विवाह के धब्बे से कलंकित न होने दें
बाल विवाह रोकथाम जिला स्तरीय कंट्रोल रूम एवं परियोजना स्तरीय कंट्रोल रूम बनाए गए है। बाल विवाह संबंधित जानकारी बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), जिला कार्यक्रम अधिकारी (महिला एवं बाल विकास), पुलिस अधीक्षक, पुलिस थाना प्रभारी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत, परियोजना अधिकारी, महिला एवं बाल विकास, पर्यवेक्षक व आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को दे तथा इसकी सूचना 6262240299 (वनस्टॉप सेन्टर बालाघाट), टोल फ्री नंबर-1098 (चाईल्ड लाईन नंबर) एवं महिला हेल्प लाईन नंबर- 181 पर दिया जा सकता है।




