आरटीआई का जवाब बना सवालों की फेहरिस्त:
मझौली (जबलपुर)
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) मझौली की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनवरी 2020 से नवंबर 2025 तक डॉक्टरों हेतु लगाए गए मोबिलिटी वाहनों को लेकर दायर आरटीआई के जवाब में कार्यालय मुख्य खण्ड चिकित्सा अधिकारी, सामु.स्वा.के. मझौली ने साफ किया है कि केंद्र स्तर पर डॉक्टरों या स्वास्थ्य अधिकारियों को कोई भी सरकारी वाहन, मोबिलिटी वाहन या एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई।
जवाब में यह भी कहा गया कि वाहनों का संचालन जिला जबलपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय द्वारा ठेका पद्धति से कराया जाता है। वाहन का प्रकार, मॉडल, रजिस्ट्रेशन नंबर, खरीद वर्ष, व्यय विवरण, चालकों की नियुक्ति व वेतन, रखरखाव खर्च, खराब या अनुपयोगी वाहनों का विवरण तथा डॉक्टरों के वाहन उपयोग से जुड़े नियम—हर एक बिंदु की जानकारी के लिए जिला कार्यालय से संपर्क करने की बात कही गई है।
आरटीआई के इस उत्तर ने स्थानीय स्वास्थ्य प्रशासन की जवाबदेही और रिकॉर्ड प्रबंधन पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। जब सीएचसी स्तर पर किसी भी प्रकार का वाहन उपलब्ध नहीं है, तो आपात परिस्थितियों में डॉक्टरों की आवाजाही कैसे होती है? यदि वाहन ठेके पर जिला स्तर से संचालित हैं, तो उनका उपयोग, निगरानी और रिकॉर्ड ब्लॉक स्तर पर क्यों नहीं?
सूचना अधिकार के तहत मांगी गई लगभग हर जानकारी को जिला कार्यालय की ओर टाल देना, पारदर्शिता की भावना के विपरीत माना जा रहा है। अब सवाल यह है कि क्या जिला कार्यालय से समयबद्ध, पूर्ण और स्पष्ट जानकारी मिलेगी, या यह मामला भी फाइलों के बीच उलझकर रह जाएगा। आरटीआई ने जवाब कम, सवाल ज्यादा खड़े कर दिए हैं—और मझौली की जनता अब ठोस जवाब चाहती है।




