पूर्व आईएएस अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह ने भारतीय टीवी चैनलों की कवरेज पर तीखा प्रहार करते हुए कहा है कि “युद्ध ईरान में नहीं, भारत के टीवी स्टूडियो में चल रहा है।”
नई दिल्ली
उनके इस बयान के बाद मीडिया की भूमिका और जिम्मेदारी को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
सूर्य प्रताप सिंह ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए आरोप लगाया कि टीवी चैनल सायरन, ग्राफिक्स और ‘ब्रेकिंग न्यूज़’ के नाम पर झूठी चिंता और भय का माहौल बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय घटनाओं की रिपोर्टिंग में संतुलन और तथ्यात्मकता जरूरी है, न कि सनसनी और टीआरपी की होड़।
उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलीं। एक वर्ग ने इसे मीडिया की अतिरंजना पर करारा प्रहार बताया, तो वहीं कुछ लोगों ने कहा कि वैश्विक तनाव की खबरों को गंभीरता से दिखाना भी मीडिया की जिम्मेदारी है।
मीडिया विश्लेषकों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय संघर्ष या तनाव की रिपोर्टिंग में दृश्य प्रभाव और नाटकीय प्रस्तुति दर्शकों का ध्यान खींचती है, लेकिन इससे कभी-कभी वास्तविक स्थिति से अधिक भय का माहौल बन सकता है। ऐसे में संपादकीय संतुलन और तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग की अहमियत और बढ़ जाती है।
सूर्य प्रताप सिंह के इस बयान ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भारतीय मीडिया को आत्ममंथन की जरूरत है? क्या टीआरपी की दौड़ में खबरों की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी पीछे छूट रही है? आने वाले दिनों में यह बहस और तेज होने के संकेत हैं।




