अभिभावकों को शैक्षणिक सामग्रियों की खरीदी पर भारी छूट तो प्रदान कर ही रहा है।
जबलपुर
शिक्षा के व्यवसायीकरण के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए बच्चों और अभिभावकों को संबल भी प्रदान कर रहा है। पुस्तक मेला के छटवें दिन आज रविवार की शाम राज्यसभा सांसद श्रीमति सुमित्रा वाल्मीकी ने माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर उनके साथ संभागायुक्त श्री अभय वर्मा, कलेक्टर श्री दीपक सक्सेना, अपर कलेक्टर श्री नाथूराम गोंड एवं जिला शिक्षा अधिकारी घनश्याम सोनी भी मौजूद रहे।
राज्यसभा सांसद श्रीमती सुमित्रा वाल्मीकि ने हिन्दू नववर्ष की शुभकामनाएँ देते हुए पुस्तक मेला के आयोजन को जिला प्रशासन की सराहनीय पहल बताया। उन्होंने कहा कि पुस्तक मेला के आयोजन को किसी देवतुल्य कार्यक्रम से कम नहीं आंका जा सकता। माता-पिता अपने बच्चों को पढ़ा लिखाकर उनके उज्जवल भविष्य का निर्माण करने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। वे हर छोटी-बड़ी आवश्यकताओं से समझौता करते हैं लेकिन अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए प्रत्येक आवश्यक शैक्षणिक सामग्री किसी भी दाम पर खरीदकर उन्हें उपलब्ध कराते हैं। एक समय के बाद जब अभिभावकों को शैक्षणिक सामग्रियों को खरीदने उपयुक्त मूल्य से कई गुना ज्यादा मूल्य चुकाना पड़ता है तो वे त्रस्त हो जाते हैं और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ शिकायत करते हैं।
सांसद श्रीमती वाल्मीकि ने कलेक्टर दीपक सक्सेना द्वारा अभिभावकों को राहत दिलाने हेतु मनमानी फीस वसूली की रोकथाम तथा पुस्तक विक्रेताओं एवं प्रकाशकों के गठजोड़ को तोड़ने के लिए की गई कार्यवाही को एक सराहनीय कदम बताया। उन्होंने कहा कि कलेक्टर श्री सक्सेना संस्कारधानी वासियों के साथ एक परिवार के रूप में जुड़कर उनकी सेवा कर रहे हैं। उन्होंने शिक्षा विभाग द्वारा मेले में लगाए गए बुक बैंक स्टॉल की सराहना की और मौजूद अधिकारियों से ग्रामीण क्षेत्र में पुस्तक मेला आयोजित करने की बात कही ताकि ग्रामीण बच्चों को ग्रामीण क्षेत्र में सभी पाठ्य पुस्तकें और आवश्यक सामग्री उपलब्ध हो सके और उन्हें खरीदी करने के लिए शहर न आना पड़े।
संभागायुक्त श्री अभय वर्मा ने भी पुस्तक मेला के आयोजन की प्रशंसा की उन्होंने कहा कि अभिभावकों के चेहरे पर पुस्तक एवं अन्य शैक्षणिक सामग्री क्रय करने के बाद ख़ुशी झलकना पुस्तक मेला की सफलता को दर्शाता है। उन्होंने पुस्तक मेला के आयोजन को जिला प्रशासन का सराहनीय कदम बताया और इसके लिए जिला प्रशासन को शुभकामनाएं भी दीं।
पुस्तक मेला में पुरानी पुस्तकों के आदान-प्रदान के लिए लगाया गया बुक बैंक स्टॉल भी बच्चों के लिए उपयोगी सिद्ध हो रहा है। इस स्टॉल पर विद्यार्थी अपनी पुरानी पुस्तकें दान कर सकते हैं। शिक्षा विभाग द्वारा लगाए गए इस स्टॉल पर विद्यार्थियों को एनसीईआरटी की पहली से पांचवी तक की पुस्तकों का सेट 50 रुपए, कक्षा छठवीं से आठवीं तक की पुस्तकों का सेट 100 रूपए, कक्षा नौवीं एवं दसवीं की पुस्तकों का सेट 150 रुपए तथा कक्षा ग्यारहवीं एवं बारहवीं की पुस्तकों का सेट 200 रूपए में उपलब्ध कराया जा रहा है। विद्यार्थियों द्वारा दी जाने वाली यह राशि जिला रेडक्रॉस सोसायटी के खाते में जमा की जायेगी। बुक बैंक के संचालन के लिए विद्यालयों एवं नागरिकों से पुरानी पुस्तकों का संकलन किया जा रहा है। पुस्तक मेला में मयूर संघवी एवं रमेश पारीख जैन द्वारा आज 125 किताबों को दान दिया गया है।
कलेक्टर दीपक सक्सेना की पहल पर लगातार दूसरे वर्ष आयोजित पुस्तक मेला में पाठ्य पुस्तकें, यूनिफार्म एवं स्कूल बैग आदि सामग्री खरीदने के लिए आज रविवार को बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे और अभिभावक मेला स्थल पर पहुंचे। पुस्तक मेला का आज छटवां दिन था मेला में लगभग 60 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं। मेले में छात्र–छात्राओं को कैरियर काउंसलिंग प्रदान करने के लिए भी स्टॉल लगाया जा रहा है। इसके साथ ही पुस्तक मेले में फूड स्टॉलों के साथ बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले भी लगाए गए हैं। सोमवार से शुक्रवार तक पुस्तक मेला शाम 4 बजे से रात्रि 10 बजे तक तथा शनिवार को दोपहर 12 बजे से रात 10 बजे तक खुला रहेगा।




