तीन दशक पुराने जमीन विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पैतृक संपत्ति को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है।
जबलपुर
कोर्ट ने कहा कि पैतृक संपत्ति वही मानी जाएगी जो पिता, दादा या परदादा से प्राप्त हो जबकि नानी (मातृ पक्ष) की संपत्ति इस श्रेणी में नहीं आती।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि **नानी की संपत्ति पर किसी भी व्यक्ति का जन्म से अधिकार नहीं होता**। ऐसे में पिता उस संपत्ति को अपनी इच्छानुसार बेच सकते हैं या किसी को भी हस्तांतरित कर सकते हैं।
यह फैसला जबलपुर के एक 30 साल पुराने जमीन विवाद में सुनाया गया है, जो लंबे समय से न्यायालय में लंबित था। इस निर्णय से ऐसे कई मामलों में स्पष्टता आएगी, जहां पैतृक और गैर-पैतृक संपत्ति को लेकर विवाद चल रहे हैं।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला भविष्य में संपत्ति संबंधी मामलों में एक अहम मिसाल साबित होगा।




