सार्वजनिक हैंडपंप चोरी — नगर परिषद जवाब देने में नाकाम
मझौली (जबलपुर)
एक ओर नगर परिषद मझौली गणतंत्र दिवस के अवसर पर नागरिकों को संदेश दे रही है —जल ही जीवन है, नलों में टोंटी लगवाएँ, जल व्यर्थ न बहाएँ”
दूसरी ओर नगर के ही सार्वजनिक हैंडपंप गायब हो रहे हैं — और उनके रखरखाव व चोरी हुए मटेरियल की जानकारी तक विभाग के पास उपलब्ध नहीं है।
नगर परिषद द्वारा जारी विज्ञापन में जल संरक्षण, स्वच्छता और कर अदायगी को लेकर जागरूकता संदेश दिए गए हैं।
परंतु जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट दिख रही है।
“जब सार्वजनिक पानी के साधन ही सुरक्षित नहीं, तो टोंटी लगाने का नारा किसके लिए?”
कई वार्डों में लगे सार्वजनिक हैंडपंप चोरी हो चुके हैं, कुछ जर्जर हालत में पड़े हैं —लेकिन नगर परिषद मझौली का पीएचई विभाग यह तक बताने की स्थिति में नहीं कि:चोरी हुए हैंडपंप किन वार्डों से गायब हुए?
इनका रखरखाव कौन कर रहा था?
चोरी हुए पाइप/मटेरियल की कीमत कितनी है?
एफआईआर हुई या नहीं?
जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
पेयजल संकट वाले वार्डों में लोगों को टैंकर या निजी साधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
सूत्रों के अनुसार, जिन हैंडपंपों पर नगर की बड़ी आबादी निर्भर थी — वह अब अस्तित्व में ही नहीं।
प्रशासन के दोगले दावे — पोस्टर में व्यवस्था, सड़क पर लाचारगी
नगर परिषद द्वारा विज्ञापन में यह अपील की गई —“अपने घरों में टोंटी लगवाएं, स्वच्छता अपनाएं, समय पर कर जमा करें।”
पर नागरिकों का कहना है —“पहले सार्वजनिक संसाधन तो सुरक्षित करिए, पानी तो उपलब्ध कराइए, फिर हमसे जिम्मेदारी की बात करिए!”
सूचना का अधिकार के तहत जब चोरी हुए हैंडपंप और मटेरियल की जानकारी मांगी गई,
तो विभाग स्पष्ट जवाब देने में असफल रहा —जिससे पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
चोरी का खुलासा हो
जिम्मेदार अधिकारी/कर्मचारियों पर कार्रवाई
तत्काल हैंडपंपों की पुनर्स्थापना
पानी की वैकल्पिक एवं दीर्घकालिक व्यवस्था
पोस्टर-बैनर और सरकारी संदेशों में जल संरक्षण का उपदेश देने वाली नगर परिषद मझौली
अगर सार्वजनिक पेयजल संसाधनों का संरक्षण करने में ही असफल है तो यह नीति और नीयत — दोनों की गंभीर विफलता है।




