पेसा (PESA) मोबिलाइज़रों एवं रोजगार सहायकों के अधिकारों से जुड़े लंबे समय से लंबित मुद्दों को विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से मजबूती से उठाया गया है।
भोपाल
इस पहल के बाद सरकार पर इन कर्मचारियों की समस्याओं के निराकरण और ठोस कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है।
ध्यानाकर्षण के दौरान पेसा मोबिलाइज़रों और रोजगार सहायकों के मानदेय, सेवा सुरक्षा, कार्य की अनिश्चितता और अधिकारों की स्पष्टता जैसे अहम सवाल रखे गए। वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और ग्रामीण रोजगार योजनाओं की रीढ़ माने जाने वाले इन कर्मियों की अनदेखी न केवल अन्याय है, बल्कि योजनाओं की सफलता पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।
विधानसभा में यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि यदि सरकार ने शीघ्र निर्णय नहीं लिया, तो जमीनी स्तर पर असंतोष और बढ़ेगा। अब निगाहें सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं—क्या यह ध्यानाकर्षण सिर्फ रिकॉर्ड में दर्ज होगा या अधिकारों की बहाली की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे?




