मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से खाकी को दागदार करने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है।
भोपाल
नजीराबाद थाना प्रभारी (TI) अरुण शर्मा और आरक्षक मनोज धाकड़ पर गांजा तस्करों से सांठगांठ करने और रिश्वत लेकर उन्हें छोड़ने के आरोप में कड़ी गाज गिरी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों ने तत्काल प्रभाव से दोनों को लाइन अटैच कर दिया है और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना 30 मार्च की है। नजीराबाद थाने के आरक्षक मनोज धाकड़ ने दो आरोपियों—सीताराम यादव उर्फ राधे यादव और जितेंद्र यादव—को 430 ग्राम गांजे के साथ पकड़ा था। नियमतः पकड़े जाने के बाद आरोपियों पर एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act) के तहत मामला दर्ज किया जाना था, लेकिन थाने पहुंचते ही कहानी बदल गई।
1.70 लाख रुपये में हुई ‘डील’
सूत्रों का कहना है कि आरोपियों को कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए थाने में ही सौदेबाजी शुरू हो गई। आरक्षक मनोज धाकड़ ने इस पूरी डील में बिचौलिया (मिडिएटर) की भूमिका निभाई। कथित तौर पर 1.70 लाख रुपये की रिश्वत लेकर दोनों तस्करों को बिना किसी कानूनी कार्रवाई के थाने से ही छोड़ दिया गया।
SDOP की रिपोर्ट पर गिरी गाज
पुलिस विभाग के अंदर चल रहे इस ‘खेल’ की भनक एसडीओपी (SDOP) वैशाली करहालिया को लग गई। उन्होंने मामले की आंतरिक जांच की और तथ्यों की पुष्टि होने के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट पुलिस अधीक्षक (SP) को सौंपी। रिपोर्ट के आधार पर अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों को देखते हुए थाना प्रभारी अरुण शर्मा और आरक्षक मनोज धाकड़ को लाइन अटैच करने के आदेश जारी किए गए।
विभागीय जांच शुरू
राजधानी में पुलिसकर्मियों द्वारा तस्करों को संरक्षण देने के इस मामले ने महकमे की छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। फिलहाल दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच (Departmental Inquiry) बैठा दी गई है, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में उन पर और भी कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
रिपोर्ट: ब्यूरो चीफ, न्यूज़ नेटवर्क




