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Tuesday, February 24, 2026

माझी समाज को ST अधिकार पर विधानसभा में फिर उठा सवाल, सरकार के जवाब पर टिकी निगाहें

मध्यप्रदेश विधानसभा में माझी अनुसूचित जनजाति से जुड़े अधिकारों और प्रमाणपत्रों को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

भोपाल/मध्यप्रदेश |

09 जुलाई 2025 क्षेत्र क्रमांक : 199 | Online No.: 43328

क्षेत्र क्रमांक 199 से विधायक डॉ. हिरालाल अलावा द्वारा जनजातीय कार्य विभाग से संबंधित अतारांकित प्रश्न क्रमांक 1121‌ को पुनः विधानसभा में उठाया गया है, जिसकी बैठक (उत्तर) की तिथि 08 अगस्त 2025 निर्धारित है। यह प्रश्न पूर्व में दिए गए 13 मार्च 2023 के उत्तर के तारतम्य में लगाया गया है

डॉ. अलावा ने सवाल किया है कि क्या 07 जनवरी 1950 के संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार मध्यप्रदेश में माझी अनुसूचित जनजाति के पर्याय के रूप में केवट, मल्हार, भोई, ढीमर को स्वीकार किया जा चुका है। साथ ही उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद गठित जनजाति-छानबीन समिति के निर्णय (दिनांक 18.03.2019) का हवाला देते हुए पूछा है कि क्या माझी जाति का परंपरागत व्यवसाय मछली पकड़ना, नाव चलाना, जल कृषि और मजदूरी आधिकारिक रूप से मान्य किया गया है।

सबसे अहम सवाल यह उठाया गया है कि जब परंपरागत व्यवसाय और जातीय पहचान स्वीकार की जा चुकी है, तो फिर प्रदेश के माझी, केवट, ढीमर, भोई, मल्लाह जैसे समुदायों को अनुसूचित जनजाति के जाति प्रमाण-पत्र क्यों जारी नहीं किए जा रहे। यह स्थिति सीधे तौर पर सरकार की नीतियों और अमल पर सवाल खड़े करती है।

विधानसभा प्रश्न में यह भी उल्लेख किया गया है कि 06 अगस्त 2018 को तत्कालीन मंत्री अंतरसिंह आर्य की अध्यक्षता में गठित मंत्रिमंडलीय समिति ने स्पष्ट माना था कि ढीमर, केवट, कहार, भोई, निषाद और मल्लाह जातियां माझी अनुसूचित जनजाति में समाहित हैं और इनमें कोई प्राकृतिक भिन्नता नहीं है। डॉ. अलावा ने उस समिति की पूरी रिपोर्ट दस्तावेजों सहित मांगी है, साथ ही 2018 से पूर्व गठित सभी समितियों की रिपोर्ट भी सार्वजनिक करने की मांग की है।

इसके अलावा राज्य सरकार द्वारा केंद्र सरकार से किए गए समस्त पत्राचार की प्रतियां भी मांगी गई हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि माझी जनजाति और उसकी उपजातियों को ST का लाभ दिलाने के लिए वास्तव में क्या प्रयास किए गए।

अब सवाल यह है कि जनजातीय कार्य विभाग और राज्य सरकार विधानसभा में क्या ठोस जवाब देती है। क्या माझी समाज को लंबे समय से लंबित अनुसूचित जनजाति का अधिकार मिलेगा, या फिर यह मामला एक बार फिर कागजों और समितियों तक ही सीमित रह जाएगा—इस पर पूरे प्रदेश के माझी समाज की नजर टिकी हुई है।

सुंदरलाल बर्मन
सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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