मानदेय बढ़ोतरी की मांग पर स्पष्ट जवाब, वर्तमान प्रावधान ही लागू
भोपाल
पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय बढ़ाने की मांग के बीच पंचायत मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने दो टूक बयान देते हुए कहा है कि सरपंच और पंच का पद मूलतः समाजसेवा के लिए है, न कि नियमित रोजगार के रूप में। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में जो मानदेय प्रावधान है, वही नियमानुसार दिया जा रहा है।
मंत्री ने जानकारी दी कि सरपंच को वर्तमान में ₹4,250 प्रतिमाह मानदेय दिया जाता है, जबकि पंच को ₹300 प्रति बैठक के मान से अधिकतम ₹1,800 वार्षिक भुगतान का प्रावधान है। यह राशि नियमों के अनुसार जारी की जा रही है।
उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव स्वेच्छा से लड़े जाते हैं और इसका उद्देश्य ग्राम विकास एवं जनसेवा है। पद को वेतनभोगी नौकरी की तरह देखना उचित नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पंचायतों की कार्यक्षमता और संसाधनों को मजबूत करने पर सरकार गंभीर है।
मंत्री के इस बयान के बाद पंचायत प्रतिनिधियों में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ सरपंचों का कहना है कि बढ़ती जिम्मेदारियों और प्रशासनिक दबाव के बीच मानदेय अपर्याप्त है, जबकि सरकार का तर्क है कि यह पद सेवा भावना से जुड़ा है।
अब देखना होगा कि क्या भविष्य में मानदेय पुनरीक्षण पर कोई समिति गठित होती है या वर्तमान व्यवस्था ही जारी रहती है।




