नगर परिषद मझौली में आरटीआई कानून की खुली अवहेलना
मंत्री कार्यालय के निर्देश भी बेअसर, सूचना देने से भाग रहे जिम्मेदार
मझौली (जबलपुर) संवाददाता
नगर परिषद मझौली में शिकायतों की जांच और जवाबदेही की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री, मध्यप्रदेश शासन के कार्यालय द्वारा 21 मार्च 2023 को नगर परिषद मझौली से संबंधित शिकायत पर जांच एवं आवश्यक कार्यवाही के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद आज तक न तो जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की गई और न ही दोषियों पर की गई कार्यवाही की जानकारी सामने आई।
सूचना दबाने के इस खेल की परतें तब खुलीं जब वार्ड क्रमांक 12 निवासी सुन्दरलाल बर्मन ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत जांच, उत्तरदायित्व निर्धारण और दंडात्मक कार्रवाई से जुड़े अभिलेख मांगे। लेकिन नगर परिषद के लोक सूचना अधिकारी ने 30 दिन की वैधानिक समय-सीमा का उल्लंघन करते हुए कोई सूचना उपलब्ध नहीं कराई।
चौंकाने वाली बात यह रही कि प्रथम अपील के बाद भी नगरीय प्रशासन विभाग के प्रथम अपीलीय अधिकारी ने न तो सुनवाई की और न ही कोई आदेश पारित किया। यह आचरण महज़ लापरवाही नहीं, बल्कि जानबूझकर सूचना छिपाने का संकेत देता है।
कानून विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला आरटीआई एक्ट की धारा 7, 19 और 20 का सीधा उल्लंघन है, जिसमें संबंधित अधिकारियों पर ₹25 हजार तक जुर्माना, विभागीय कार्रवाई और मुआवजा तक का प्रावधान है। अब मामला राज्य सूचना आयोग पहुंच चुका है, जहां यह तय होगा कि जवाबदेही तय होगी या फिर फाइलों में ही सिमट जाएगी सच्चाई।
सवाल ये है—
जांच हुई या नहीं?
दोषी कौन हैं?
और यदि सब कुछ सही था, तो सूचना देने से डर क्यों?
यह सिर्फ एक आरटीआई नहीं, बल्कि नगर परिषद मझौली की पारदर्शिता की असली परीक्षा है।




