आउटसोर्सिंग का नया डिजिटल अवतार, सीधे खाते में आएगा वेतन
भोपाल।
सरकारी विभागों में आउटसोर्सिंग के नाम पर कर्मचारियों के वेतन में होने वाली कमीशनखोरी और बिचौलियों के दखल पर सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा प्रहार किया है। आगामी 1 अप्रैल से आउटसोर्सिंग व्यवस्था का ‘नया डिजिटल अवतार’ लागू होने जा रहा है, जिससे हजारों कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी।
अब ‘हाथ’ नहीं, सीधे ‘खाते’ में पहुंचेगी मेहनत की कमाई
नए नियमों के मुताबिक, अब किसी भी निजी एजेंसी या बिचौलिए के माध्यम से वेतन का भुगतान नहीं किया जाएगा। सरकार ने एक ऐसी डिजिटल व्यवस्था तैयार की है जिसके तहत कर्मचारियों का वेतन सीधे उनके बैंक खातों (Direct Benefit Transfer – DBT) में जमा किया जाएगा। इससे पहले कई बार ऐसी शिकायतें आती थीं कि ठेकेदार या एजेंसियां कर्मचारियों के वेतन से मोटा कमीशन काट लेती थीं या समय पर भुगतान नहीं करती थीं।
नए सिस्टम की 3 मुख्य विशेषताएं:
कमीशनखोरी पर लगाम: वेतन की पूरी राशि बिना किसी कटौती के सीधे कर्मचारी को मिलेगी।
पारदर्शिता और ट्रैकिंग: डिजिटल पोर्टल के जरिए यह ट्रैक किया जा सकेगा कि किस कर्मचारी को किस तारीख को भुगतान हुआ।
ईपीएफ और ईएसआई का हिसाब: वेतन के साथ-साथ पीएफ और बीमा राशि का विवरण भी पारदर्शी होगा, जिसमें कंपनियां अब हेरफेर नहीं कर सकेंगी।
बिचौलियों के लिए बंद हुए रास्ते
सरकारी सिस्टम में सालों से जमे बिचौलियों के लिए यह नया नियम किसी बड़े झटके से कम नहीं है। अब तक आउटसोर्सिंग एजेंसियां कर्मचारियों और विभाग के बीच एक मजबूत दीवार बनी हुई थीं, जिसका फायदा उठाकर वे कर्मचारियों का आर्थिक शोषण करती थीं। डिजिटल अवतार लागू होते ही इन एजेंसियों की भूमिका केवल ‘जनशक्ति प्रबंधन’ (Manpower Management) तक सीमित रह जाएगी, पैसों के लेनदेन पर सरकार का सीधा नियंत्रण होगा।
“1 अप्रैल से लागू होने वाली यह व्यवस्था न केवल भ्रष्टाचार को खत्म करेगी, बल्कि उन हजारों आउटसोर्स कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा भी प्रदान करेगी जो दिन-रात सरकारी तंत्र को चलाने में अपना योगदान देते हैं।”
ब्यूरो रिपोर्ट: मझौली दर्पण न्यूज़




