वर्ष 2026 का पहला चंद्र ग्रहण मंगलवार (3 मार्च) को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। यह खगोलीय घटना दोपहर 3:21 बजे शुरू हुई और शाम 6:47 बजे तक चली।
नई दिल्ली
देश के पूर्वी हिस्सों में ग्रहण का प्रभाव सबसे पहले दिखाई दिया, जहां आसमान में चंद्रमा का बदलता स्वरूप लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा।
खगोल विज्ञान के अनुसार, जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है, तब चंद्र ग्रहण होता है। इस दौरान चंद्रमा का रंग धूसर से हल्का लालिमा लिए दिखाई दे सकता है, जिसे आम बोलचाल में “ब्लड मून” भी कहा जाता है। हालांकि, ग्रहण का स्वरूप स्थान विशेष के अनुसार अलग-अलग रहा।
पूर्वी भारत के शहरों में लोग छतों और खुले मैदानों में इस खगोलीय दृश्य को देखने के लिए जुटे रहे। कई स्थानों पर खगोल प्रेमियों ने दूरबीन और कैमरों के जरिए इस पल को कैद किया। मौसम अनुकूल होने के कारण दृश्य स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
धार्मिक मान्यताओं के चलते कई लोगों ने ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ और विशेष सावधानियां भी बरतीं। वहीं वैज्ञानिकों ने इसे प्राकृतिक और सुरक्षित खगोलीय घटना बताते हुए किसी प्रकार की भ्रांति से बचने की अपील की।
अब खगोल प्रेमियों की निगाहें वर्ष के अगले चंद्र ग्रहण पर टिकी हैं, जो अंतरिक्षीय घटनाओं के प्रति लोगों की जिज्ञासा को और बढ़ाएगा।




