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Monday, February 23, 2026

विकास” के दावों की पोल खुली, जनता की जान दांव पर

शहपुरा हाईवे (बरगी विधानसभा) का नया पुल फिर ढहा 

चेतावनी और ज्ञापन के बावजूद अनदेखी, अब दूसरा हिस्सा भी गिरा

शहपुरा/बरगी | विशेष रिपोर्ट

बरगी विधानसभा अंतर्गत शहपुरा हाईवे पर हाल ही में निर्मित नया पुल एक बार फिर ढह गया। पहले हिस्से के गिरने के बाद स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी थी, ज्ञापन सौंपे थे, गंभीर खामियों की ओर ध्यान दिलाया था—लेकिन प्रशासन और निर्माण एजेंसी ने आंखें मूंदे रखीं। नतीजा सामने है: अब पुल का दूसरा हिस्सा भी गिर चुका है।

यह घटना केवल एक तकनीकी विफलता नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही, घटिया निर्माण और संभावित भ्रष्टाचार का ज्वलंत उदाहरण बन चुकी है।

सुरक्षा ऑडिट कहाँ है?

नियमों के अनुसार किसी भी बड़े पुल या हाईवे संरचना के लिए सुरक्षा ऑडिट, गुणवत्ता परीक्षण और थर्ड पार्टी निरीक्षण अनिवार्य होता है। सवाल उठता है—क्या इस पुल का समय पर स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट हुआ?

यदि हुआ, तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं? यदि नहीं हुआ, तो किस अधिकारी की अनुमति से पुल चालू किया गया?जांच क्यों नहीं हुई?

पहला हिस्सा गिरने के बाद भी न तो एफआईआर दर्ज हुई,न किसी इंजीनियर, ठेकेदार या अधिकारी पर कार्रवाई हुई,और न ही निर्माण एजेंसी को ब्लैकलिस्ट किया गया। यह चुप्पी साफ संकेत देती है कि गलतियों को दबाने का प्रयास किया गया।

शहपुरा हाईवे से रोज़ाना सैकड़ों वाहन, स्कूली बसें, एम्बुलेंस और मालवाहक गुजरते हैं। यदि यह हादसा पीक ट्रैफिक के समय होता, तो बड़ी जनहानि से इंकार नहीं किया जा सकता था।

स्थानीय लोगों का कहना है—अगर कोई आम नागरिक छोटा सा नियम तोड़े तो चालान, एफआईआर, जेल—और जब सरकारी पुल गिरता है तो कोई जिम्मेदार नहीं?”
 घटिया निर्माण या सुनियोजित भ्रष्टाचार?

विशेषज्ञों का मानना है कि नए पुल का बार-बार ढहना दर्शाता है—मानक सामग्री का उपयोग नहीं हुआ

डिज़ाइन और लोड कैपेसिटी में गंभीर खामियां हैं निर्माण के दौरान गुणवत्ता नियंत्रण की पूरी तरह अनदेखी हुई

यह सब बिना ऊपर से संरक्षण के संभव नहीं। ऐसे में यह मामला केवल विभागीय लापरवाही नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।

कानूनी जवाबदेही तय होना जरूरी

कानून स्पष्ट है—यदि लापरवाही से बनाई गई सार्वजनिक संरचना से जनहानि की आशंका उत्पन्न होती है, तो यह

भारतीय दंड संहिता लोक निर्माण नियम और सार्वजनिक सुरक्षा कानूनों का उल्लंघन है।

अब मांग उठ रही है कि— उच्च स्तरीय तकनीकी जांच हो दोषी ठेकेदार और अधिकारियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज हो सुरक्षा ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए सख्त कार्रवाई हो

यह सिर्फ एक पुल नहीं टूटा, बल्कि विकास” के खोखले दावों की नींव हिल गई है।

अब सवाल साफ है— जिम्मेदार कौन है? कार्रवाई कब होगी?और क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?बरगी और शहपुरा की जनता जवाब चाहती है—और इस बार चुप नहीं बैठेगी।

सुंदरलाल बर्मन
सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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