मप्र शिक्षा विभाग का सबसे बड़ा ‘डिजिटल डाका’

 ₹60 हजार का स्मार्ट बोर्ड ₹2 लाख में? मंत्री उदय प्रताप सिंह से जवाब की मांग तेज

भोपाल/जबलपुर

मध्य प्रदेश के शिक्षा विभाग में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के नाम पर एक बहुत बड़े ‘सुनियोजित घोटाले’ की आशंका ने तूल पकड़ लिया है। प्रदेशभर के सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम (Smart Classrooms) बनाने के लिए खरीदे गए डिजिटल स्मार्ट बोर्ड (Digital Smart Boards) की कीमतों में बाज़ार मूल्य और सरकारी खरीद मूल्य के बीच चौंकाने वाला भारी अंतर सामने आया है।

विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से जो जानकारी मिल रही है, उसके अनुसार यह सीधे-सीधे सरकारी खजाने पर ‘डिजिटल डाका’ है, जिसमें नियमों को ताक पर रखकर कथित तौर पर करोड़ों रुपये का वारा-न्यारा किया गया है।

🔍 क्या है पूरा मामला? बाज़ार मूल्य बनाम सरकारी खरीद मूल्य

मझौली दर्पण न्यूज़ को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के अनुसार, स्कूलों में लगाए गए स्मार्ट बोर्ड की खरीद प्रक्रिया पूरी तरह से संदेह के घेरे में है।

एक नज़र कीमतों के अंतर पर:

बाज़ार मूल्य: एक मानक स्मार्ट बोर्ड (सभी सहायक उपकरणों के साथ) की बाज़ार में कीमत लगभग ₹50,000 – ₹60,000 के बीच है।

सरकारी खरीद मूल्य: शिक्षा विभाग ने कथित तौर पर यही स्मार्ट बोर्ड ₹1,80 लाख से ₹2 लाख प्रति यूनिट की दर से खरीदे हैं।

यानी, प्रति यूनिट लगभग ₹1.20 लाख से ₹1.40 लाख तक का सीधा अंतर!

यदि प्रदेशभर के हजारों स्कूलों में यह खरीद हुई है, तो यह मामला आसानी से सैकड़ों करोड़ रुपये के घोटाले में बदल सकता है, जिसकी जाँच नितांत आवश्यक है।

⚖️ GeM पोर्टल और टेंडर नियमों की कथित अनदेखी

सरकारी खरीद विशेषज्ञों का कहना है कि नियमानुसार, इतनी बड़ी खरीद के लिए:GeM पोर्टल (Government e-Marketplace) का उपयोग अनिवार्य होता है, जहाँ पारदर्शी तरीके से सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी को ऑर्डर मिलता है।

प्रतिस्पर्धात्मक बोली (Competitive Tendering) प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए।

इसके बावजूद, यदि इतनी अत्यधिक और बाज़ार से 3-4 गुना अधिक कीमत पर खरीद हुई है, तो यह सीधे-सीधे वित्तीय अनियमितता, मिलीभगत और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।

🗣️ स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह से जवाब की मांग

इस पूरे कथित घोटाले के सामने आने के बाद, अब स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह सीधे सवालों के घेरे में हैं।

जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर तीखा आक्रोश व्यक्त किया है। मझौली दर्पण न्यूज़ से बात करते हुए कई प्रतिनिधियों ने मांग की है कि:तत्काल इस पूरी खरीद प्रक्रिया की उच्च स्तरीय जाँच (SIT जाँच) हो।

खरीद प्रक्रिया में शामिल जिम्मेदार अधिकारियों को तुरंत सस्पेंड कर उन पर कड़ी कार्रवाई हो।

जनता के सामने खरीद के सभी दस्तावेज़ और टेंडर प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता के साथ लाया जाए।

स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं (जैसे- टॉयलेट, पानी, बिजली) के अभाव के बीच, इस तरह की महंगी और संदिग्ध खरीद ने शिक्षकों और आम नागरिकों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। नाम न छापने की शर्त पर एक शिक्षक ने कहा:

“जहाँ स्कूलों में छत से पानी टपकता है और बच्चों के पास बैठने के लिए टाट-पट्टी नहीं है, वहाँ डिजिटल शिक्षा के नाम पर इस तरह की महंगी खरीद सीधे भ्रष्टाचार की बू देती है। यह बच्चों के भविष्य के साथ धोखा है।”

🧾 RTI से खुल सकते हैं बड़े राज: गोदामों में बंद टेंडर दस्तावेज़?

सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले को उजागर करने के लिए कुछ जागरूक नागरिक और सामाजिक संगठन बड़े पैमाने पर RTI (सूचना का अधिकार) आवेदन की तैयारी कर रहे हैं। RTI से जो जानकारी सामने आने की उम्मीद है, उसमें शामिल हैं:

सप्लायर कंपनियों के नाम और उनके अनुभव का विवरण।

वास्तविक भुगतान विवरण और इनवॉइस (Bill details)।टेंडर प्रक्रिया की नोटशीट और निर्णय लेने वाले अधिकारियों के हस्ताक्षर। RTI के इन दस्तावेजों से पता चलेगा कि क्या यह खेल किसी चुनिंदा कंपनी को लाभ पहुँचाने के लिए किया गया था?

डिजिटल शिक्षा के नाम पर यदि वाकई इस तरह का “डिजिटल डाका” पड़ा है, तो यह सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था के साथ एक बड़ा धोखा है। यह गरीब बच्चों के हक पर डाका है, जो अच्छे स्कूलों की उम्मीद में सरकारी स्कूलों में आते हैं। अब देखना यह है कि डॉ. मोहन यादव सरकार इस पर कड़ी कार्रवाई करती है या यह मामला भी अन्य बड़े घोटालों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाता है।

(मझौली दर्पण न्यूज़ | सतर्क पत्रकारिता)

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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