30.4 C
Jabalpur
Thursday, February 26, 2026

अमरकंटक का अद्भुत श्रीयंत्र मंदिर — भारत की अनदेखी धरोहर

हजारों वर्षों से खड़ी विरासत, पर जागरूकता का अभाव—अब समय है इसे दुनिया के सामने लाने का

विशेष रिपोर्ट

भारत को ‘धरती माता’ कहा जाता है क्योंकि इसकी संस्कृति, परंपराएँ और वास्तुकला हजारों वर्षों की ज्ञान-परंपरा को अपने भीतर समेटे हुए हैं। इन्हीं अनमोल धरोहरों में से एक है अमरकंटक (मध्यप्रदेश) का अद्भुत और अद्वितीय श्रीयंत्र मंदिर—एक ऐसा प्राचीन स्थापत्य जो अपनी रहस्यमयी कला, ऊर्जा-संरचना और अनोखे वास्तुशिल्प के लिए विश्व में अलग पहचान रखता है। यह मंदिर न सिर्फ आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा और ऊर्जा-तंत्र की उस गहराई का प्रतीक है जिसे समझने के लिए आधुनिक विज्ञान भी आज शोध कर रहा है। मंदिर की संरचना में स्थापित श्रीयंत्र भारतीय तंत्र-शास्त्र, गणितीय ज्यामिति और ऊर्जा-विन्यास का बेजोड़ संगम है।

लेकिन यह भी कटु सत्य है कि भारत की इस अनूठी धरोहर से आधे से ज्यादा भारतीय अनजान हैं। यह मंदिर यहाँ सदियों से खड़ा है, परंतु इसके इतिहास, महत्व और विशेषताओं को लेकर वैसी जागरूकता कभी नहीं दिखाई गई, जैसी होनी चाहिए थी। स्थानीय समुदाय और तीर्थयात्रियों के अलावा इसका नाम भी बहुत कम लोग जानते हैं।

एक ओर जहाँ भारत विरासत संरक्षण की बात करता है, वहीं दूसरी ओर ऐसी धरोहरों को न तो मुख्यधारा मीडिया में स्थान मिलता है और न ही किसी स्तर पर इनका व्यापक प्रचार-प्रसार होता है। समाजशास्त्रियों का मानना है कि औपनिवेशिक काल से चली आ रही मानसिकता और आधुनिक प्रशासनिक ढांचे ने स्थानीय संस्कृति और प्राचीन ज्ञान परंपरा को वह महत्त्व नहीं दिया, जिसके वे वास्तविक हकदार थे।

लेकिन अब समय बदल रहा है—और इसके साथ ही जनचेतना भी तेज़ी से बढ़ रही है।

लोग अपनी संस्कृति, अपने गौरव और अपनी जड़ों को समझने की ओर लौट रहे हैं।

अमरकंटक का श्रीयंत्र मंदिर न सिर्फ वास्तुकला का चमत्कार है, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक शक्ति और वैज्ञानिक अध्यात्मिकता का जीवंत प्रमाण भी है।

आज आवश्यकता इस बात की है कि—ऐसी धरोहरों का व्यापक प्रचार-प्रसार हो इन्हें पर्यटन एवं शोध केंद्र के रूप में विकसित किया जाए

युवा पीढ़ी को इनके इतिहास और महत्व से जोड़ा जाए

सरकार तथा समाज मिलकर संरक्षण के लिए पहल करें

क्योंकि विरासत तभी जीवित रहती है, जब समाज उसे याद रखे और सम्मान दे।

आइए—इस विश्व मानवता को चमत्कृत करने वाले गौरवशाली मंदिर और भारत की अन्य धरोहरों को दुनिया के सामने नई पहचान दें।

अपनी महान विरासत का प्रचार करें, उसका संरक्षण करें—यही

सच्ची राष्ट्र सेवा है।

सुंदरलाल बर्मन
सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

Latest News

Stay Connected

0FansLike
28FollowersFollow
0FollowersFollow
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

Most View