राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने मध्यम वर्ग की आर्थिक बदहाली को लेकर सरकार पर जोरदार हमला बोला।
नई दिल्ली
उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में पहली बार नौकरीपेशा मध्यम वर्ग से वसूला गया इनकम टैक्स ₹11 लाख करोड़ तक पहुंच गया है, जबकि बड़ी-बड़ी अरबपति कंपनियों से टैक्स कलेक्शन घटकर ₹9.8 लाख करोड़ रह गया। चड्ढा ने इसे “नीतिगत अन्याय” करार देते हुए कहा कि देश की अर्थव्यवस्था का सबसे भारी बोझ अब उसी वर्ग पर डाला जा रहा है जो पहले से महंगाई की मार झेल रहा है।
उन्होंने बताया कि महंगाई 6.8% की रफ्तार से बढ़ रही है, लेकिन वेतन वर्षों से जमे हुए हैं। पिछले एक साल में शिक्षा 8%, किराया 7%, स्वास्थ्य 9%, भोजन 6% और परिवहन 5% तक महंगा हो चुका है। इसके बावजूद टैक्स स्लैब में कोई राहत नहीं—नतीजा, मिडिल क्लास “सैंडविच क्लास बनकर रह गया है।
चड्ढा ने मांग की कि स्टैंडर्ड डिडक्शन ₹75,000 से बढ़ाकर ₹1.5 लाख किया जाए। उनका साफ संदेश था—बजट आंकड़ों का खेल नहीं, मध्यम वर्ग को राहत देने का औजार बने, वरना विकास के दावे कागजों तक सीमित रह जाएंगे।




