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Friday, February 27, 2026

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का रथ रोके जाने पर भड़का बवाल, सड़कों पर उतरे समर्थक

प्रयागराज में संत बनाम प्रशासन आमने-सामने

प्रयागराज

धार्मिक नगरी प्रयागराज में उस वक्त स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब प्रशासन ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के रथ को रोक दिया। देखते ही देखते यह कार्रवाई धार्मिक आस्था और प्रशासनिक सख्ती की टकराहट में बदल गई और शहर में बवाल जैसे हालात बन गए।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपने समर्थकों के साथ रथ यात्रा के माध्यम से निर्धारित कार्यक्रम में जा रहे थे। इसी दौरान प्रशासन ने अनुमति का हवाला देते हुए रथ को आगे बढ़ने से रोक दिया। इस पर संत समाज और अनुयायियों में गहरा आक्रोश फैल गया।

संतों की आस्था पर पहरा?” — उठे तीखे सवाल

रथ रोके जाने की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में समर्थक मौके पर एकत्र हो गए।

जय श्रीराम और हर-हर महादेव के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा।

समर्थकों का आरोप है कि प्रशासन जानबूझकर धार्मिक गतिविधियों में बाधा डाल रहा है, जबकि संत समाज के कार्यक्रमों को परंपरागत रूप से सम्मान मिलना चाहिए।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मौके पर ही कहा—“यह केवल एक रथ नहीं, सनातन परंपरा और धार्मिक स्वतंत्रता का प्रश्न है। प्रशासन को आस्था का सम्मान करना चाहिए।”

प्रशासन का पक्ष: कानून-व्यवस्था सर्वोपरि

वहीं प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि

रथ यात्रा के लिए पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी,

भीड़ बढ़ने से कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका थी,

इसलिए एहतियातन रथ को रोका गया।

अधिकारियों ने दावा किया कि स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और किसी को भी कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

तनाव, नारेबाज़ी और भारी पुलिस बल

रथ रोके जाने के बाद कुछ समय के लिए

सड़क पर जाम तीखी नारेबाज़ी और प्रशासन विरोधी प्रदर्शन देखने को मिला।

हालांकि देर शाम तक बातचीत के प्रयास शुरू हुए, लेकिन घटना ने प्रदेश की सियासत और प्रशासनिक कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं

राजनीतिक गलियारों में हलचल

इस घटना के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर

धार्मिक भावनाओं को आहत करने”का आरोप लगाया,

वहीं सत्तापक्ष ने इसे कानून-व्यवस्था से जोड़कर उचित ठहराने की कोशिश की।

बड़ा सवाल

क्या यह मामला सिर्फ अनुमति का था?

या फिर धार्मिक नेतृत्व और प्रशासन के बीच बढ़ती दूरी का संकेत

प्रयागराज की इस घटना ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि आस्था और कानून के बीच संतुलन कैसे बने?

स्थिति पर प्रशासन की अगली कार्रवाई और संत समाज का रुख आने वाले दिनों में अहम होगा।

सुंदरलाल बर्मन
सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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