नगर परिषद मझौली द्वारा 17 नवंबर 2025 को जारी की गई दुकानों के अंतरण की तृतीय/चतुर्थ सूचना अब सवालों के घेरे में है।
मझौली जबलपुर
नगर परिषद ने अचल संपत्ति अंतरण नियम 2016 व संशोधित नियम 2021 का हवाला देते हुए 09 दुकानों को 30 वर्ष की अवधि के लिए ऑनलाइन निविदा पर देने का दावा किया, लेकिन हकीकत यह है कि अब तक एक भी दुकान का वास्तविक आवंटन नहीं हो सका।
सूचना में ऑनलाइन टेंडर, आरक्षण वर्ग, अमानत राशि, आरक्षित मूल्य और किराया तक सब दर्ज है—यहां तक कि स्पष्ट किया गया कि अखबारों में कोई प्रकाशन नहीं होगा, केवल वेबसाइट पर जानकारी मिलेगी। सवाल यह है कि जनहित की संपत्ति के आवंटन में पारदर्शिता क्यों दबाई गई?
स्थानीय व्यापारियों का आरोप है कि सीमित प्रचार, तकनीकी बाधाएं और अस्पष्ट शर्तें जानबूझकर रखी गईं, ताकि प्रतिस्पर्धा कम रहे। परिषद कार्यालय के सामने प्रथम तल की दुकानों तक का विवरण होने के बावजूद निविदा प्रक्रिया परिणामविहीन है।
अब मांग उठ रही है कि पूरी प्रक्रिया की सार्वजनिक समीक्षा, निविदा परिणामों का प्रकाशन और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। वरना यह मामला नगर परिषद की नीयत और नीति—दोनों पर बड़ा प्रश्नचिह्न बनकर रहेगा।




