मध्य प्रदेश सरकार की अति महत्वाकांक्षी ‘सांदीपनि स्कूल योजना’ एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है।
लटेरी (विदिशा)
विदिशा जिले के लटेरी विधानसभा क्षेत्र में सामने आए परीक्षा परिणाम ने शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत उजागर कर दी है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, कक्षा 9 के सेक्शन C में 93 में से 92 छात्र फेल हो गए, जबकि पूरे स्कूल के आंकड़ों पर नजर डालें तो कुल 332 छात्रों में से 245 छात्र असफल घोषित हुए हैं। यह आंकड़े न केवल चौंकाने वाले हैं, बल्कि शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल भी खड़े कर रहे हैं।
इतनी बड़ी संख्या में छात्रों के फेल होने से यह साफ संकेत मिलता है कि— शिक्षा की गुणवत्ता में भारी गिरावट आई है पढ़ाई और मूल्यांकन प्रणाली में गंभीर खामियां हैं छात्रों को उचित मार्गदर्शन और संसाधन नहीं मिल पा रहे
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की कमजोरी को उजागर करता है।
नतीजों के बाद स्थानीय अभिभावकों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। उनका कहना है कि— “बच्चों का भविष्य दांव पर लगा दिया गया है”“स्कूल में पढ़ाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई जा रही है”अभिभावकों ने दोषी शिक्षकों और अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
लटेरी में आयोजित एक जन-संवाद कार्यक्रम के दौरान क्षेत्रीय विधायक उमाकांत शर्मा ने भी इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि— “इतने बड़े स्तर पर छात्रों का फेल होना बेहद गंभीर मामला है, इसकी जांच होनी चाहिए और जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद अब— शिक्षा विभाग की भूमिका पर जांच की मांग तेज हो गई है स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों की जवाबदेही तय करने की बात उठ रही है छात्रों के भविष्य को लेकर ठोस कदम उठाने की जरूरत बताई जा रही है
सरकार जहां शिक्षा सुधार के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं इस तरह के परिणाम उन दावों की पोल खोलते नजर आ रहे हैं।
अब देखना यह होगा कि— क्या इस मामले में जिम्मेदारों पर कार्रवाई होती है? या फिर यह मुद्दा भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
✍️ (रिपोर्ट: मझौली दर्पण न्यूज़)




