जिले के शिक्षा विभाग में एक गंभीर प्रकरण सामने आया है, जिसमें एक ही शिक्षिका पर स्कूल के छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं लिखने का आरोप सिद्ध होने के बावजूद विभागीय स्तर पर मामले को दबाने और नाममात्र की कार्रवाई कर जिम्मेदारों को बचाने का आरोप लगा है।
कटनी
यह मामला नेताजी सुभाष चंद्र बोस छात्रावास, बड़गांव (जनपद शिक्षा केंद्र रीठी ) में पदस्थ वार्डन एवं प्राथमिक शिक्षिका कंचन खरे से जुड़ा है।
शिकायतकर्ता गोविंद लोधी के अनुसार, सत्र 2023–24 की वार्षिक परीक्षा में कक्षा पांचवीं की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच के दौरान यह पाया गया कि कई छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं एक ही लिखावट में लिखी गई हैं, जो संबंधित शिक्षिका कंचन खरे की लिखावट से मेल खाती हैं। इसके बावजूद जिला शिक्षा विभाग ने प्रारंभिक जांच में लापरवाही बरतते हुए न केवल शिक्षिका को क्लीन चिट दी, बल्कि कथित तौर पर “पारितोषिक” के रूप में उन्हें छात्रावास का वार्डन भी नियुक्त कर दिया।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि उन्होंने 30 जून 2024 को इस संबंध में पहली शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन उस समय वार्डन नियुक्ति प्रक्रिया प्रचलन में होने के बावजूद उनकी शिकायत पर निष्पक्ष जांच नहीं की गई। बिना शिकायतकर्ता के बयान लिए ही विभागीय जांच समाप्त कर दी गई, जो नियम विरुद्ध है। इसके बाद 8 जुलाई 2024 को दूसरी शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन तत्कालीन प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा इस पर भी लीपापोती करते हुए शिक्षिका को निर्दोष घोषित कर दिया गया।
लगातार दबाव के बाद मामला विकासखंड शिक्षा अधिकारी बड़वारा को सौंपा गया, जहां गंभीरता से जांच की गई। जांच में उत्तर पुस्तिकाओं का मिलान करने पर शिकायत सही पाई गई और प्रारंभिक तौर पर शिक्षिका को दोषी माना गया। बावजूद इसके, जिला शिक्षा अधिकारी कटनी द्वारा केवल एक वेतन वृद्धि रोकने जैसी हल्की सजा दी गई, जिसे शिकायतकर्ता ने नियमों के विरुद्ध और अपर्याप्त बताया है।
शिकायतकर्ता गोविंद लोधी ने मांग की है कि दोषी शिक्षिका को तत्काल वार्डन पद से हटाया जाए और उनके विरुद्ध विस्तृत विभागीय जांच कराई जाए। इसी मांग को लेकर उन्होंने 4 फरवरी 2024 को मुख्य कार्यपालन अधिकारी को भी आवेदन सौंपा है। यह पूरा प्रकरण शासकीय स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता और विभागीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।




