संयुक्त संचालक, नगरीय प्रशासन जबलपुर संभाग के आदेश से मझौली में नई बहस
मझौली (जबलपुर)
सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगने वाले वार्ड क्रमांक 09 निवासी शिवम साहू के प्रकरण में नया विवाद खड़ा हो गया है। कार्यालय संयुक्त संचालक, नगरीय प्रशासन एवं विकास, जबलपुर संभाग द्वारा पारित आदेश में प्रथम अपील को 50 रुपये अपील शुल्क संलग्न न होने के आधार पर अमान्य घोषित कर दिया गया।
मामला नगर परिषद मझौली से संबंधित सूचना आवेदन दिनांक 20/11/2025 से जुड़ा है, जिस पर समयसीमा में निराकरण न होने के कारण शिवम साहू ने प्रथम अपील प्रस्तुत की थी। आदेश में स्पष्ट उल्लेख है कि “सूचना का अधिकार (फीस तथा अपील) नियम, 2005” के तहत प्रथम अपील के साथ 50 रुपये शुल्क या नॉन-ज्यूडिशियल स्टाम्प अनिवार्य है। शुल्क संलग्न न होने के कारण अपील निरस्त कर दी गई।
परंतु सवाल यह उठ रहा है कि शिवम साहू बीपीएल कार्डधारक हैं। सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 7(5) के अनुसार बीपीएल श्रेणी के आवेदकों से आवेदन शुल्क नहीं लिया जाता। ऐसे में अपील शुल्क की मांग और अपील निरस्त किए जाने पर स्थानीय स्तर पर नाराजगी देखी जा रही है।
जानकारों का कहना है कि बीपीएल आवेदकों को शुल्क छूट का लाभ दिया जाना चाहिए। यदि विभाग ने शुल्क अनिवार्य माना है, तो क्या बीपीएल स्थिति का परीक्षण किया गया? क्या आवेदक को शुल्क जमा करने हेतु अवसर दिया गया? ये प्रश्न अब चर्चा में हैं।
आदेश में यह भी उल्लेखित है कि यदि अपीलार्थी असहमत है तो वह 90 दिवस के भीतर मध्यप्रदेश राज्य सूचना आयोग, अरेरा हिल्स, भोपाल में द्वितीय अपील प्रस्तुत कर सकता है।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह मामला केवल 50 रुपये का नहीं, बल्कि पारदर्शिता और बीपीएल हितग्राहियों के अधिकारों का है। मझौली जैसे कस्बे में सूचना के अधिकार के माध्यम से जवाबदेही तय करने की कोशिशें यदि तकनीकी आधार पर रोकी जाएंगी, तो यह व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़ा करेगा।
अब देखना होगा कि शिवम साहू आयोग में अपील दायर करते हैं या विभाग स्वयं इस आदेश की पुनर्समीक्षा करता है। फिलहाल मझौली में यह मुद्दा प्रशासनिक संवेदनशीलता और RTI व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर बहस का विषय बन गया है।




