सूचना के अधिकार से मांगी गई जानकारी अब तक गोपनीय
मझौली (जबलपुर)
नगर परिषद मझौली के पीएचई विभाग द्वारा वर्ष 2024 से 2025 के बीच किए गए हैंडपंप सुधार और मेंटेनेंस कार्यों पर अब सवाल उठने लगे हैं। वार्ड क्रमांक 12 निवासी बारे लाल बर्मन ने सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नगर परिषद से इन कार्यों से जुड़ी विस्तृत जानकारी मांगी है, लेकिन निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बावजूद अब तक कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ है।
आरटीआई आवेदन में बारे लाल बर्मन ने जनवरी 2024 से सितंबर 2025 तक नगर परिषद के पीएचई (पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग) विभाग द्वारा किए गए सभी हैंडपंप सुधार और मेंटेनेंस कार्यों से संबंधित सत्यापित बिलों की प्रतियां संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के नाम-पदनाम, तथा कार्यादेश व टेंडर दस्तावेजों की जानकारी मांगी थी।
उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि यदि कोई सूचना अन्य विभाग से संबंधित हो, तो उसे अधिनियम की धारा 6(3) के तहत संबंधित कार्यालय को अग्रेषित किया जाए।
आरटीआई आवेदन 18 सितंबर 2025 को नगर परिषद मझौली के जन सूचना अधिकारी के कार्यालय में प्राप्त हुआ था। बावजूद इसके, अधिनियम में निर्धारित 30 दिनों की अवधि के भीतर कोई उत्तर या सूचना प्रदान नहीं की गई। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि सूचना सार्वजनिक नहीं की जा रही है, तो संभव है कि कार्यों में अनियमितता या अपारदर्शिता रही हो।
बारे लाल बर्मन का कहना है:
“मैंने हैंडपंप सुधार कार्यों के बिल और अधिकारियों की जानकारी इसलिए मांगी थी ताकि जनता को यह पता चले कि नगर परिषद ने वास्तव में कितना खर्च किया और कितने हैंडपंप सुधारे गए। लेकिन आज तक जवाब नहीं मिला। अगर सूचना नहीं दी गई तो मैं प्रथम अपील करूंगा।”
वार्ड 12 के कई नागरिकों ने बताया कि पिछले डेढ़ वर्ष में हैंडपंपों की हालत में कोई विशेष सुधार नहीं दिखा, फिर भी हर साल लाखों रुपये के मेंटेनेंस बिल पारित किए जाते हैं। नागरिकों ने इस पूरे मामले की जांच की मांग की है।
सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 7(1) के अनुसार, जन सूचना अधिकारी को आवेदन प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर मांगी गई सूचना प्रदान करनी होती है। ऐसा न करने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है।




