मध्य प्रदेश में जल संरक्षण और संवर्धन को जन आंदोलन का रूप देने के उद्देश्य से राज्य सरकार इस वर्ष भी “जल गंगा संवर्धन अभियान” का संचालन करने जा रही है।
भोपाल
यह अभियान 19 मार्च (वर्ष प्रतिपदा) से प्रारंभ होकर 30 जून तक प्रदेशभर में चलाया जाएगा।
राज्य शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, इस अभियान के अंतर्गत नई जल संरचनाओं का निर्माण, पुरानी संरचनाओं की साफ-सफाई एवं मरम्मत, भूजल संवर्धन और जल स्रोतों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसके साथ ही गांव-गांव में जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर आमजन की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
इंदौर से होगा राज्य स्तरीय शुभारंभ
अभियान का राज्य स्तरीय शुभारंभ 19 मार्च को इंदौर स्थित इस्कॉन मंदिर में मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा किया जाएगा। इसी दिन प्रदेश के सभी जिलों में नदी या अन्य जल स्रोतों के समीप कार्यक्रम आयोजित कर अभियान की शुरुआत की जाएगी।
जनभागीदारी बनेगी अभियान की ताकत
अभियान को सफल बनाने के लिए समाज और सरकार की साझेदारी पर विशेष ध्यान दिया गया है। प्रत्येक ग्राम पंचायत और नगरीय निकाय में जल संरक्षण से जुड़े कार्य प्रारंभ किए जाएंगे। साथ ही युवाओं को ‘जल दूत’ के रूप में तैयार कर अभियान से जोड़ा जाएगा, जो जन-जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
बहु-विभागीय समन्वय से होगा क्रियान्वयन
अभियान के प्रभावी संचालन के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जल संसाधन, नगरीय विकास, कृषि, वन, शिक्षा सहित कई विभागों को शामिल किया गया है। जिला स्तर पर कलेक्टर नोडल अधिकारी होंगे, जबकि विकासखंड स्तर पर एसडीएम के नेतृत्व में कार्यों की मॉनिटरिंग की जाएगी।
जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की तैयारी
सरकार का लक्ष्य इस अभियान को केवल शासकीय कार्यक्रम तक सीमित न रखकर जन आंदोलन का स्वरूप देना है। इसके लिए पौधारोपण, जल स्रोतों की सफाई, प्रदूषण नियंत्रण और जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार जैसे कार्य व्यापक स्तर पर किए जाएंगे।




