बीपीएल कार्डधारी से आरटीआई में पैसे मांगने का खेल!
जबलपुर | मझौली
एक ओर सरकार “सुशासन” के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर जनपद पंचायत मझौली में सूचना का अधिकार अधिनियम को खुलेआम कुचला जा रहा है।
ग्राम पंचायत अमगवा-दिवरी की नल-जल योजना की बदहाली को लेकर बीपीएल कार्डधारी नागरिक बारे लाल बर्मन ने आरटीआई के तहत जानकारी मांगी, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि
बीपीएल होने के बावजूद उनसे ₹50 शुल्क की मांग कर दी गई।
जबकि आरटीआई एक्ट, 2005 की धारा 7(5) स्पष्ट कहती है कि बीपीएल आवेदक से कोई शुल्क नहीं लिया जा सकता।
30 दिन बीत जाने के बाद भी न सूचना दी गई न आवेदन स्थानांतरित हुआ उल्टा पुराने आदेशों का हवाला देकर आवेदक को गुमराह किया गया
यह सवाल खड़ा करता है कि
क्या नल-जल योजना में कुछ छिपाने की कोशिश की जा रही है?
क्या इसलिए आरटीआई को रोका जा रहा है?
अब पीड़ित आवेदक ने मामला राज्य सूचना आयोग तक पहुंचाने की तैयारी कर ली है और दोषी अधिकारियों पर धारा 20 के तहत जुर्माने की मांग की है।




