निषाद जयंती के अवसर पर दमोह में आयोजित विशाल कार्यक्रम में माझी समाज ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार आवाज उठाई।
दमोह
हजारों लोगों की मौजूदगी में मध्य प्रदेश माझी जनजाति संयुक्त संघर्ष समिति के प्रांतीय संयोजक टीकाराम रैकवार ने मंच से सरकार पर वादाखिलाफी और समाज के साथ अन्याय के गंभीर आरोप लगाए।
टीकाराम ने अपने संबोधन में बताया कि 8 अप्रैल 2023 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निवास पर केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते और वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में माझी समाज के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक हुई थी।
इस बैठक में समाज की चार प्रमुख मांगों पर चर्चा हुई थी, जिनमें से एक मांग—पिछड़ा वर्ग सूची के क्रमांक 12 से माझी उपनामों को विलोपित करना—पर सहमति बनी थी, लेकिन आज तक इस पर कोई आदेश जारी नहीं हुआ। आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में माझी समाज के साथ अन्याय और भेदभाव बढ़ा है।उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि उज्जैन में आयोजित निषाद महासम्मेलन में समाज के लोगों को नजरअंदाज किया गया, जबकि अन्य वर्गों को प्राथमिकता दी गई।
2 मार्च 2026 को बड़वानी में हुई कैबिनेट बैठक में तालाबों की खुली नीलामी के निर्देश को लेकर भी समाज ने कड़ा विरोध जताया। कहा कि यह निर्णय वंशानुगत मछुआरों के अधिकारों का हनन है और इससे गरीब माझी परिवारों की आजीविका पर सीधा संकट खड़ा होगा।
समाज के प्रतिनिधियों ने मध्य प्रदेश मछुआ नीति 2008 में बिना प्रक्रिया के बदलाव की आशंका जताते हुए इसे संविधान और नियमों के खिलाफ बताया। उन्होंने मांग की कि किसी भी संशोधन से पहले विधिवत प्रक्रिया और मछुआ कल्याण बोर्ड की सहमति अनिवार्य की जाए।
माझी समाज ने सरकार के सामने प्रमुख मांगें रखीं— एसटीएफ द्वारा जाति प्रमाण पत्र जांच के नाम पर की जा रही कार्रवाई तुरंत रोकी जाए
मछुआ नीति 2008 में कोई बदलाव न किया जाए
8 अप्रैल 2023 के वादे के अनुसार ओबीसी सूची से माझी उपनाम हटाने का आदेश जारी किया जाए
जल से जुड़े समुदायों को अनुसूचित जनजाति के अंतर्गत आरक्षण का लाभ सुनिश्चित किया जाए
इस रैली में जिला अध्यक्ष महेंद्र बर्मन के नेतृत्व में बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए। कार्यक्रम में कई सामाजिक व जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे और समाज की मांगों का समर्थन किया।
निषाद जयंती के मंच से उठी यह आवाज साफ संकेत देती है कि माझी समाज अब अपने अधिकारों को लेकर निर्णायक लड़ाई के मूड में है। अब देखना होगा कि सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है।




