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Friday, February 27, 2026

मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों को नोटिस, पर्यावरणीय लापरवाही पर जवाब तलब

देश के करोड़ों नागरिकों के जीवन के मूल अधिकार—पेयजल पर मंडरा रहे गंभीर खतरे को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने केंद्र और राज्य सरकारों की नींद उड़ा दी है।

नई दिल्ली 

मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में पेयजल की बदहाली और पर्यावरण के खुलेआम हो रहे दोहन पर ट्रिब्यूनल ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए तीनों राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

एनजीटी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि स्वच्छ पेयजल केवल सुविधा नहीं, बल्कि नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है और इसके साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही सीधे मानव जीवन के साथ खिलवाड़ के समान है।

ज़हरीला पानी, सूखे नल और दम तोड़ती नदियाँ

एनजीटी के संज्ञान में लाए गए मामलों में सामने आया कि—कई क्षेत्रों में भूजल में फ्लोराइड, नाइट्रेट और भारी धातुओं की मात्रा खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी है,

नदियाँ और जलाशय औद्योगिक अपशिष्ट और सीवेज से प्रदूषित हो रहे हैं,

गांवों और कस्बों में नल से पानी नहीं, मजबूरी बह रही है

अवैध खनन और अंधाधुंध दोहन से जलस्तर लगातार गिरता जा रहा है

ट्रिब्यूनल ने माना कि यह स्थिति केवल प्राकृतिक कारणों से नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और नीति विफलता का नतीजा है।

राज्य सरकारों से सीधे सवाल

एनजीटी ने तीनों राज्यों से पूछा है—पेयजल स्रोतों के संरक्षण के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए?

जल प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर क्या कार्रवाई हुई?

भूजल दोहन रोकने के लिए कौन-सी प्रभावी नीति लागू है?

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल की गारंटी कैसे दी जा रही है?

ट्रब्यूनल ने यह भी संकेत दिए हैं कि संतोषजनक जवाब न मिलने की स्थिति में कड़े निर्देश, जुर्माना और व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जा सकती है।

पर्यावरण के साथ खुला खिलवाड़

एनजीटी की टिप्पणी में यह भी कहा गया है कि— नदियों के किनारे अवैध निर्माण ,जलस्रोतों पर अतिक्रमण,बिना पर्यावरणीय स्वीकृति के परियोजनाएं,और खनन गतिविधियों की मनमानी ने पूरे जल-पर्यावरण तंत्र को गंभीर संकट में डाल दिया है।

प्रशासनिक सिस्टम पर उठे सवाल

इस नोटिस ने राज्यों के जल संसाधन, नगरीय विकास और पर्यावरण विभागों की कार्यप्रणाली पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में पेयजल संकट विकराल रूप ले सकता है।

जनहित में बड़ा संदेश

पर्यावरणविदों और सामाजिक संगठनों ने एनजीटी के रुख का स्वागत करते हुए कहा है कि— “जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक नदियाँ बचेंगी नहीं और लोगों को शुद्ध पानी नहीं मिलेगा।”

अब सबकी नजरें अगली सुनवाई पर

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि तीनों राज्य सरकारें एनजीटी के सामने क्या जवाब और क्या कार्ययोजना पेश करती हैं।

यह मामला केवल तीन राज्यों तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए चेतावनी है कि जल और पर्यावरण के साथ खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

एनजीटी का यह सख्त रुख बताता है कि पानी और पर्यावरण पर लापरवाही अब कानूनी संकट में बदल चुकी है अब सवाल यह है—क्या सरकारें चेतेंगी या फिर अदालतें ही प्रशासन को रास्ता दिखाती रहेंग

सुंदरलाल बर्मन
सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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