अब सिर्फ़ चुनाव जीतना काफी नहीं होगा—काम नहीं किया तो जनता कुर्सी छीन लेगी!
राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने 11 फरवरी 2026 को संसद में “Right to Recall” की मांग उठाकर भारतीय राजनीति को सीधी चुनौती दे दी है।
नई दिल्ली
सवाल सीधा है—अगर विधायक या सांसद नाकाम, भ्रष्ट या वादाखिलाफ़ी करे, तो जनता 5 साल क्यों इंतज़ार करे?
चड्ढा ने इसे लोकतंत्र की बीमा पॉलिसी बताया। प्रस्ताव के मुताबिक, रिकॉल कोई मज़ाक नहीं बने—इसके लिए 35–40% मतदाताओं के हस्ताक्षर और अंतिम वोटिंग में 50% बहुमत की शर्त होगी। जब जज और राष्ट्रपति तक हटाए जा सकते हैं, तो जनप्रतिनिधि क्यों नहीं?
यह प्रस्ताव नेताओं के लिए चेतावनी है—अब जवाबदेही सिर्फ़ चुनावी भाषणों तक सीमित नहीं रहेगी। सत्ता की कुर्सी जनता की है, और फैसला भी जनता ही करेगी!




