मुख्यमंत्री अधोसंरचना उन्नयन विकास योजना के तहत मझौली नगर परिषद में वर्ष 2019 से जुलाई 2025 तक बनी सीसी सड़कों की जानकारी छिपाने का मामला अब कानूनी टकराव में बदल गया है।
मझौली/जबलपुर
वार्ड क्रमांक 12 निवासी बारे लाल वर्मन द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत मांगी गई जानकारी को नगर परिषद द्वारा निर्धारित समय-सीमा में उपलब्ध नहीं कराया गया, जिसे प्रथम अपीलीय अधिकारी ने स्पष्ट रूप से कानून का उल्लंघन माना है।
प्रथम अपील की सुनवाई में संयुक्त संचालक, नगरीय प्रशासन एवं विकास, जबलपुर संभाग ने नगर परिषद मझौली के लोक सूचना अधिकारी/मुख्य नगर पालिका अधिकारी की उदासीनता और लापरवाही को गंभीर माना। अपील में यह भी उजागर हुआ कि न तो सीसी रोड कार्यों की लोकेशन, लंबाई-चौड़ाई, स्वीकृत राशि, ठेकेदार, गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट, और न ही योजना बोर्ड न लगाने से जुड़े अभिलेख दिए गए।
संयुक्त संचालक ने एकपक्षीय निर्णय लेते हुए आदेश पारित किया कि नगर परिषद 15 दिवस के भीतर समस्त वांछित जानकारी निःशुल्क उपलब्ध कराए, अन्यथा प्रकरण राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील हेतु भेजा जाएगा, जहां दंडात्मक कार्रवाई तय मानी जा रही है।
यह मामला न केवल RTI कानून की अवहेलना है, बल्कि सरकारी योजनाओं में संभावित अनियमितताओं और पारदर्शिता के अभाव पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।




