मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में गंभीर अनियमितता सामने आई है।
आरोप है कि मनरेगा के तहत 110 मजदूरों के नाम पर एक ही व्यक्ति की फोटो पोर्टल पर अपलोड कर दी गई जिसके आधार पर करीब 1.72 लाख रुपये की राशि निकाल ली गई
सिंगरौली
मामला सामने आने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
यह फर्जीवाड़ा Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act (मनरेगा) के ऑनलाइन पोर्टल में दर्ज मजदूरों की जानकारी की जांच के दौरान उजागर हुआ। जांच में पाया गया कि जिन मजदूरों के नाम दर्ज किए गए थे, उनमें से अधिकांश के फोटो की जगह एक ही व्यक्ति की तस्वीर बार-बार अपलोड की गई थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित ग्राम पंचायत के सचिव और तकनीकी सहायक (इंजीनियर)को उनके पद से हटा दिया है। साथ ही पूरे मामले की विस्तृत विभागीय जांच शुरू कर दी गई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि मजदूरों के नाम पर फर्जी उपस्थिति दर्ज कर भुगतान निकालने की कोशिश की गई, जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ। प्रशासन का कहना है कि यदि जांच में दोष सिद्ध हुआ तो संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों पर कड़ी विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा जैसी योजना गरीब मजदूरों को रोजगार देने के लिए बनाई गई है, लेकिन कुछ लोग फर्जीवाड़ा कर योजना की साख को नुकसान पहुंचा रहे हैं। लोगों ने मांग की है कि पूरे जिले में मनरेगा कार्यों की सघन जांच कर पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि यदि निगरानी मजबूत न हो तो विकास योजनाओं में भ्रष्टाचार और गड़बड़ी की गुंजाइश बनी रहती है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में मनरेगा से जुड़े सभी कार्यों की डिजिटल और भौतिक जांच की जाएगी, ताकि सरकारी धन की लूट पर लगाम लगाई जा सके।




