मध्यप्रदेश की राजधानी में एक ऐसा फर्जीवाड़ा सामने आया है जिसने समूचे प्रशासनिक तंत्र की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
भोपाल
कलेक्टर कार्यालय और SDM दफ्तर की नाक के नीचे रसूखदारों के नाम पर फर्जी बीपीएल (BPL) कार्ड बनाने का काला खेल चल रहा था। मामले का खुलासा होते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
कैसे हुआ खेल?
जांच में सामने आया है कि एमपी नगर SDM कार्यालय में SDM की आईडी और पासवर्ड का गलत इस्तेमाल कर 100 से अधिक अपात्र लोगों के बीपीएल कार्ड बना दिए गए। चौंकाने वाली बात यह है कि इस खेल में वन विभाग के कर्मचारी से लेकर कंप्यूटर ऑपरेटर तक शामिल थे।
भ्रष्टाचार का रेट कार्ड: 5 से 15 हजार की वसूली
गरीबों के हक पर डाका डालने वाले इन अधिकारियों और कर्मचारियों ने फर्जी कार्ड बनाने के लिए बाकायदा ‘रेट कार्ड’ तय कर रखा था। बताया जा रहा है कि एक कार्ड बनवाने के बदले 5,000 से 15,000 रुपये तक की अवैध वसूली की गई।
इन पर गिरी गाज
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है:
* किशोर मेहरा (वन रक्षक): मुख्य आरोपी, जिनके पास आईडी-पासवर्ड होने की बात सामने आई, उन्हें निलंबित कर दिया गया है।
* सुरेश बैरागी (कार्यपालन यंत्री, PWD): संलिप्तता पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से निलंबित।
* शैलेंद्र टांडेकर (बाबू): लापरवाही और भूमिका को लेकर नोटिस जारी।
* एल.के. खरे (SDM): अपनी आईडी के दुरुपयोग को लेकर घेरे में, प्रशासन उन्हें भी नोटिस थमाने की तैयारी में है।
अब पूरे जिले के कार्डों की होगी जांच
इस फर्जीवाड़े के उजागर होने के बाद कलेक्टर कार्यालय ने कड़ा रुख अपनाया है। अब पिछले एक साल के भीतर सभी SDM कार्यालयों से जारी हुए बीपीएल कार्डों का रिकॉर्ड तलब किया गया है। अंदेशा जताया जा रहा है कि जांच का दायरा बढ़ने पर कई और बड़े नाम और चौंकाने वाले आंकड़े सामने आ सकते हैं।
“गरीबों की योजनाओं में सेंधमारी करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन इस मामले की गहराई से जांच कर रहा है।”




