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Friday, February 27, 2026

मझौली मैं 23 वर्ष बाद भी अनुभाग नहीं — अधिवक्ता और जनता न्याय से वंचित

मुख्यमंत्री को भेजा गया ज्ञापन, मझौली तहसील की 23 सालों से हो रही उपेक्षा पर अधिवक्ताओं व नागरिकों का फूटा गुस्सा

मझौली (जबलपुर)।

मझौली तहसील को वर्ष 2002 में तहसील का दर्जा मिलने के बाद भी आज तक अनुभाग (Sub-Division) घोषित नहीं किए जाने के मुद्दे ने अब बड़ा रूप ले लिया है। न्याय प्राप्ति में हो रही लगातार देरी और प्रशासनिक अव्यवस्था से परेशान मझौली क्षेत्र के अधिवक्ताओं व स्थानीय नागरिकों ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को ज्ञापन भेजकर तत्काल अनुभाग घोषित करने की मांग उठाई है।

23 वर्ष बाद भी अनुभाग नहीं — अधिवक्ता और जनता न्याय से वंचित

ज्ञापन में बताया गया है कि 15 जनवरी 2002 को मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग, मंत्रालय भोपाल ने मझौली को तहसील घोषित किया था।

लेकिन आज दिनांक तक अनुभाग घोषित न होने के कारण यहाँ SDM कोर्ट स्थापित नहीं हो सकी जिससे न्यायिक कार्य लंबित मामलों में वर्षों-वर्ष देरी गरीब व ग्रामीण जनता को सिहोरा तक चक्कर काटने की मजबूरी अधिवक्ताओं को लगातार परेशानियाँ प्रशासनिक कार्यों में भारी विलंब जैसी समस्याएँ सामने आ रही हैं।

संभागायुक्त के आदेश के बावजूद SDM सप्ताहिक कोर्ट नहीं लगाते

अधिवक्ताओं ने बताया कि उन्होंने इस गंभीर स्थिति को लेकर पहले ही संभागायुक्त जबलपुर से शिकायत की थी।

इसके बाद आदेश हुआ कि सप्ताह में एक दिन अनुविभागीय अधिकारी की कोर्ट मझौली में आयोजित की जाए।”

लेकिन वास्तविकता यह है कि—SDM साहब नियमित रूप से नहीं बैठते जिसके कारण प्रकरणों में निर्णय नहीं हो पाते और सैकड़ों मामले “आदेश” पर वर्षों तक लंबित पड़े रहते हैं।

नई बनी तहसीलों में अनुभाग स्थापित, लेकिन मझौली आज भी उपेक्षित

ज्ञापन में एक बड़ा आरोप यह भी लगाया गया है कि—मझौली के बाद बनी तहसीलें:बहोरीबंद, ढीमरखेड़ा, जबेरा, बरही में अनुभाग बन चुके हैं और SDM तैनात हैं।

लेकिन मझौली, जो जबलपुर जिले की सबसे बड़ी तहसीलों में से एक है तथा 85 ग्राम पंचायतों वाला विशाल क्षेत्र है —आज भी अनुभाग से वंचित है।

ज्ञापन में कहा गया कि यह “सीधी उपेक्षा” है और कुछ स्थानीय राजनेताओं द्वारा “अवरोध उत्पन्न” करने के कारण मझौली को उसका अधिकार नहीं मिल पा रहा

न्याय मांगते अधिवक्ता बोले— अब और इंतजार नहीं

अधिवक्ताओं ने कहा कि—जब 23 साल पहले ही मझौली को तहसील घोषित कर दिया गया, तो आज तक अनुभाग न बनना सीधी प्रशासनिक उपेक्षा है। जनता न्याय के लिए भटक रही है।मुख्यमंत्री जी तुरंत अनुभाग घोषित करें।”

जनता की आवाज— न्याय दूर, दूरी ज्यादा

मझौली क्षेत्र के लोगों ने बताया—सिहोरा न्यायालय जाने में पूरा दिन बर्बाद‌गरीब किसान व बुजुर्गों के लिए यात्रा सबसे बड़ा बोझ कई लोग दूरी और खर्च के कारण न्याय पाने से वंचित तहसील बनने के बाद भी प्रशासनिक लाभ नहीं मिल पा रहा

स्थानीय लोगों ने कहा—मझौली में SDM कोर्ट शुरू होने से हजारों लोगों को न्याय और राहत मिलेगी।”

मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

ज्ञापन के अंत में नागरिकों ने मांग की है कि—वर्ष 2002 के शासन आदेश के अनुसार मझौली में जल्द से जल्द अनुभाग घोषित कर अनुविभागीय अधिकारी (SDM) की नियुक्ति की जाए।”लोगों का कहना है कि अब मामला केवल सुविधा का नहीं,‌बल्कि न्याय के अधिकार और प्रशासनिक समानता का है।

ज्ञापन सौंपने वालों में प्रमुख रूप से सौरभ (अधिवक्ता, सिविल न्यायालय सिहोरा) डी. भट्ट (एडवोकेट, तहसील कोर्ट मझौली) तथा क्षेत्र के बड़ी संख्या में नागरिक शामिल रहे।

सुंदरलाल बर्मन
सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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