खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में मझौली तहसील के धान उपार्जन तंत्र में बड़े घोटाले का सनसनीखेज खुलासा हुआ है।
मझौली (जबलपुर)
वृहताकार सेवा सहकारी संस्था मझौली द्वारा संचालित धान उपार्जन केन्द्र कोड 59333262, स्थल श्रीजी वेयरहाउस 136 में बिना धान भराई, तुलाई, सिलाई और R2T किए ही 14,934.50 क्विंटल धान की फर्जी ऑनलाइन प्रविष्टि कर ₹3,53,79,830 की शासकीय राशि की हेराफेरी सामने आई है।
संयुक्त जांच दल—संयुक्त कलेक्टर ऋषभ जैन (अध्यक्ष), तहसीलदार दिलीप हनवत, पटवारी रोहित खरे गायत्री आर्मी सहकारिता विभाग व जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अधिकारियों—द्वारा 13–14 जनवरी 2026 को की गई जांच में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। जांच में बोरियों का औसत वजन 35 किलोग्राम पाया गया, जबकि नियमानुसार 40.580 किलोग्राम होना चाहिए। भौतिक सत्यापन में 14,934.50 क्विंटल धान की कमी, किसान कोड/स्टेंसिल का अभाव, अतिरिक्त बारदाना और 174 किसानों की 14,505.20 क्विंटल फर्जी खरीदी प्रविष्टि सामने आई।
कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी ब्रिजेश कुमार जाटव की रिपोर्ट पर कलेक्टर एवं अध्यक्ष जिला उपार्जन समिति के अनुमोदन के बाद थाना मझौली में FIR क्रमांक 0022/2026 दर्ज की गई है। आरोपितों में खरीदी केन्द्र प्रभारी रत्नेश भट्ट (वार्ड 15, मझौली) और कम्प्यूटर ऑपरेटर अमन सेन शामिल हैं। दोनों पर भारतीय न्याय संहिता 2023 की धाराएं 316(2), 318(4), 3(5) के तहत मामला पंजीबद्ध किया गया है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि हेराफेरी की राशि भू-राजस्व बकाया के रूप में वसूली जाएगी और दोषियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई होगी। इस प्रकरण ने धान उपार्जन व्यवस्था की निगरानी और ई-उपार्जन पोर्टल की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।




