मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के बावजूद सरकारी मुलाजिम अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं।
शहडोल
ताजा मामला शहडोल जिले से सामने आया है, जहां रीवा लोकायुक्त की टीम ने नगर परिषद खंड बाणसागर में पदस्थ एक महिला उपयंत्री (Sub-Engineer) को रिश्वत की पहली किस्त लेते हुए रंगेहाथों दबोच लिया।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, नगर परिषद खंड बाणसागर में पदस्थ उपयंत्री सुधा वर्मा द्वारा खेल मैदान में स्टेयर (सीढ़ी) निर्माण कार्य के मूल्यांकन के बदले रिश्वत की मांग की जा रही थी। फरियादी जेके अग्रवाल ने बताया कि निर्माण कार्य पूरा हो चुका था, लेकिन उपयंत्री जानबूझकर मूल्यांकन कार्य को रोक कर बैठी थीं और इसके एवज में 20,000 रुपये की डिमांड कर रही थीं।
परेशान होकर फरियादी ने 7 अप्रैल को लोकायुक्त कार्यालय रीवा में इसकी लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत की पुष्टि होने के बाद लोकायुक्त एसपी के निर्देशन में एक ट्रैप टीम गठित की गई। योजना के मुताबिक, 9 अप्रैल को फरियादी रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 10,000 रुपये लेकर उपयंत्री सुधा वर्मा के पास पहुंचा।
जैसे ही सुधा वर्मा ने फरियादी से केमिकल लगे नोट स्वीकार किए, पास में ही सादे कपड़ों में तैनात लोकायुक्त की टीम ने उन्हें दबोच लिया। हाथ धुलवाते ही उनके हाथ गुलाबी हो गए, जो रिश्वत लेने का पुख्ता प्रमाण है। इस कार्रवाई से नगर परिषद कार्यालय में हड़कंप मच गया।
लोकायुक्त टीम ने आरोपी उपयंत्री के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर लिया है। खबर लिखे जाने तक लोकायुक्त की कार्रवाई जारी थी और टीम अन्य दस्तावेजों की भी जांच कर रही है।
ब्यूरो रिपोर्ट: मझौली दर्पण न्यूज




