सीएमएचओ कार्यालय में भ्रष्टाचार का भंडाफोड़, सरकारी पारदर्शिता पर सवाल
जबलपुर
सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगना एक नागरिक का संवैधानिक हक है, लेकिन जब उसी अधिकार के बदले रिश्वत मांगी जाए, तो यह सीधे भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है। ऐसा ही एक गंभीर मामला जबलपुर में सामने आया है, जहां मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय में पदस्थ एक महिला कर्मी को लोकायुक्त पुलिस ने ₹4,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार एक आरटीआई आवेदक ने विभाग से सूचना मांगी थी। महिला कर्मी ने आरटीआई के जवाब देने के एवज में ₹4,000 की मांग की। परेशान आवेदक ने इसकी शिकायत लोकायुक्त कार्यालय में की। शिकायत की पुष्टि के बाद लोकायुक्त टीम ने मंगलवार को जाल बिछाया और तयशुदा रकम लेते ही महिला कर्मी को धर दबोचा।
यह कार्रवाई न केवल स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि पारदर्शिता के कानून को किस तरह भ्रष्टाचार का जरिया बनाया जा रहा है। लोकायुक्त द्वारा आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।




