जबलपुर जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मझौली में चिकित्सा व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप एक बार फिर सुर्खियों में हैं।
मझौली जबलपुर
मुख्य खंड चिकित्सा अधिकारी द्वारा 12 नवंबर 2025 को जारी सख़्त निर्देशों के बावजूद स्वास्थ्य केंद्र में कुछ डॉक्टरों द्वारा प्राइवेट दवाइयाँ लिखने और मरीजों को निजी क्लीनिकों की ओर भेजकर सोनोग्राफी कराने का मामला सामने आया है।
आदेश जारी… फिर भी मनमानी जारी




कई डॉक्टर ड्यूटी समय में ही निजी प्रैक्टिस और रेफर बिजनेस में लिप्त हैं।
इस शिकायत के बाद मुख्य खंड चिकित्सा अधिकारी, डॉ दीपक गैयकवाड मझौली ने समस्त डॉक्टरों को लिखित आदेश जारी करते हुए चेतावनी दी थी कि— मरीजों को केवल अस्पताल में उपलब्ध सरकारी दवाइयाँ ही लिखी जाएँ।
प्राइवेट दवाएँ लिखते या निजी प्रैक्टिस करते पाए जाने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
लेकिन हैरानी की बात है कि आदेश के 24 घंटे भी नहीं बीते और अस्पताल से ही लगातार शिकायतें आने लगीं कि कुछ डॉक्टर पहले की तरह ही अपनी मनमानी जारी रखे हुए हैं।
मरीजों सृष्टि चौधरी वार्ड नंबर 12 निवासी और उनके परिजनों ने बताया कि_ अस्पताल में सोनोग्राफी मशीन होने के बावजूद कुछ डॉक्टर मरीजों को बाहर के निजी केंद्रों पर भेज रहे हैं।
कई बार वही डॉक्टर उन निजी सोनोग्राफी सेंटरों से ‘कमीशन’ लेने की चर्चाओं में भी रहे हैं।
मरीजों से 700 से 1200 रुपए तक वसूले जा रहे हैं, जबकि सरकारी अस्पताल में यह सुविधा या तो मुफ्त है या अत्यंत कम शुल्क पर उपलब्ध होनी चाहिए
मझौली क्षेत्र के ग्रामीणों ने बताया कि सरकार द्वारा मुफ्त दवाइयाँ और जांचें उपलब्ध होने के बावजूद
डॉक्टरों द्वारा महँगी प्राइवेट दवाइयाँ लिखना,और निजी जांच केंद्रों की ओर भेजना,सीधे-सीधे गरीब मरीजों की जेब पर डाका डालने जैसा है।
सवाल यह भी उठ रहा है कि—जब लिखित आदेश के बाद भी अनियमितताएँ जस की तस हैं, तो क्या अधिकारी केवल कागज़ी कार्रवाई कर रहे हैं?


हिंदू टाईगर फोर्स ने आज फिर बयान जारी कर कहा— “जब तक दोषी डॉक्टरों पर वास्तविक कार्रवाई नहीं होती और अस्पताल में पारदर्शिता नहीं लाई जाती, तब तक आंदोलन और तेज़ किया जाएगा।”





