धान खरीदी वर्ष 2025-26 में सेवा सहकारी समिति मर्यादित लखनपुर के उपार्जन केंद्र पर सामने आया घोटाला किसी मामूली गड़बड़ी नहीं, बल्कि पूर्व नियोजित आर्थिक अपराध है।
जबलपुर/सिहोरा
जांच में खुलासा हुआ है कि ई-उपार्जन पोर्टल का दुरुपयोग कर 24 फर्जी किसानों का पंजीयन किया गया, जिनके नाम पर 88.05 हेक्टेयर रकबा और 4111.93 क्विंटल धान दर्शाकर शासन से 97,41,162 रुपये की रकम हड़पने की साजिश रची गई।
सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि यह खेल अंतिम तिथि की रात 10 से 12 बजे के बीच खेला गया, जब सिस्टम पर निगरानी लगभग शून्य थी। यानी साफ है कि यह काम तकनीकी जानकारी, अंदरूनी पहुंच और मिलीभगत के बिना संभव ही नहीं था।
कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी ब्रजेश कुमार जाटव की रिपोर्ट पर थाना सिहोरा में समिति प्रबंधक अखिलेश कुमार पटेल और ऑपरेटर अनुराधा पटेल के खिलाफ धारा 62, 318, 336(2), 3(5) बीएनएस के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। कार्रवाई संयुक्त कलेक्टर एवं नोडल अधिकारी उपार्जन के निर्देश पर हुई।
पुलिस ने अहम दस्तावेज जब्त कर लिए हैं और अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह सिर्फ दो नामों का खेल है या पूरी चेन शामिल है? यदि समय रहते यह फर्जीवाड़ा उजागर न होता तो करोड़ों की रकम चुपचाप सिस्टम से निकल जाती। यह मामला ई-उपार्जन पोर्टल की सुरक्षा, निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। अब देखना होगा कि जांच सिर्फ मोहरों तक सिमटती है या असली मास्टरमाइंड तक पहुंचती है।




