सरकार हर साल ग्रामीण विकास के लिए करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन क्या आपके गाँव के सभी पात्र लोगों को इन योजनाओं का लाभ मिल पा रहा है? हकीकत यह है कि जानकारी के अभाव में कई जरूरतमंद परिवार आज भी सरकारी योजनाओं से वंचित हैं।
मझौली जबलपुर
विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या योजनाओं की कमी नहीं, बल्कि जागरूकता की कमी है। जब तक ग्रामीण स्वयं सक्रिय नहीं होंगे, तब तक विकास अधूरा ही रहेगा।
किन योजनाओं का लाभ मिल सकता है?
प्रधानमंत्री आवास योजना– गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्के मकान के लिए आर्थिक सहायता।
जल जीवन मिशन– हर घर तक नल से शुद्ध पेयजल पहुंचाने की योजना।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना– गांवों को पक्की सड़कों से जोड़ने का अभियान।
स्वच्छ भारत मिशन – शौचालय निर्माण, स्वच्छता और स्वास्थ्य सुधार की पहल।
इन योजनाओं का उद्देश्य स्पष्ट है—गांव का समग्र विकास और हर पात्र व्यक्ति तक लाभ पहुंचाना।
ग्राम सभा: सबसे बड़ा लोकतांत्रिक मंच
ग्राम सभा केवल औपचारिक बैठक नहीं है, बल्कि यह वह मंच है जहाँ आप सीधे सवाल पूछ सकते हैं— किन लोगों के नाम योजना सूची में हैं?
किसे लाभ मिला और किसे नहीं?
चयन प्रक्रिया पारदर्शी थी या नहीं?
यदि आप ग्राम सभा में शामिल नहीं होते, तो फैसले कुछ लोगों तक सीमित रह जाते हैं।
आत्ममंथन का समय क्या आपके गांव में सभी पात्र परिवारों को आवास मिला?
क्या हर घर में नल से पानी पहुंचा?
क्या सड़क और स्वच्छता के काम गुणवत्ता के साथ हुए?
यदि जवाब “नहीं” है, तो अगली ग्राम सभा में अपनी आवाज़ उठाना आपकी जिम्मेदारी है।
बदलाव की शुरुआत आपसे
याद रखिए—अधिकार मांगने से नहीं, जागरूकता और भागीदारी से मिलते हैं।
अब समय है चुप्पी तोड़ने का।
ग्राम सभा में जाएँ, सवाल पूछें और सुनिश्चित करें कि आपके गांव का कोई भी पात्र व्यक्ति अपने हक से वंचित न रहे।
जागरूक नागरिक ही मजबूत गांव और सशक्त लोकतंत्र की नींव है।




