जिले में जल संसाधनों के संरक्षण और संवर्धन के लिए ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ को लेकर कलेक्टर श्री राघवेन्द्र सिंह की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
जबलपुर
कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सरकार और समाज की साझा भागीदारी से जल संकट का समाधान करना और जिले की पुरानी जल संरचनाओं को नया जीवन देना है।
अभियान की मुख्य रूपरेखा और समय-सीमा
बैठक में बताया गया कि यह अभियान 19 मार्च से शुरू होकर 30 जून तक निरंतर चलेगा। कलेक्टर श्री सिंह ने निर्देश दिए कि पिछले वर्ष की सफलताओं को आधार बनाकर इस वर्ष भी प्रभावी कार्य किए जाएं। उन्होंने राज्य शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करने की बात कही।
प्रमुख कार्य योजना: सफाई से लेकर नवीन निर्माण तक
अभियान के अंतर्गत निम्नलिखित कार्यों पर विशेष जोर दिया जाएगा: नवीन संरचनाएं: नए जल संग्रहण क्षेत्रों का निर्माण और भूजल संवर्धन के प्रयास।
जीर्णोद्धार: पुरानी और ऐतिहासिक जल संरचनाओं की साफ-सफाई, मरम्मत और गहरीकरण (डीसिल्टिंग)।
प्रदूषण नियंत्रण: नदियों में मिलने वाले नालों के लिए ‘जल शोधन सिस्टम’ अपनाना ताकि जल स्रोतों को स्वच्छ रखा जा सके।
* वॉटर हार्वेस्टिंग: सभी सरकारी भवनों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य रूप से लगाए जाएं। जनपद सीईओ को इसके लिए 15 दिन की समय-सीमा दी गई है।
जन-भागीदारी और जागरूकता पर बल
कलेक्टर ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी कार्य नहीं, बल्कि एक जन-आंदोलन होना चाहिए।
“समाज के विभिन्न संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं और नागरिकों को इस अभियान से जोड़ें। मानसून से पहले पौधारोपण की तैयारी करें और बोरी बंधान जैसे कार्यों में प्रगति लाएं।”
बैठक में अधिकारियों को सचेत किया गया कि जिले के कार्यों की समीक्षा राज्य स्तर पर रैंकिंग के माध्यम से की जाएगी।
* सभी गतिविधियों और जल संवर्धन कार्यों को ‘माय भारत पोर्टल’ पर नियमित रूप से अपलोड करना अनिवार्य होगा।
* पिछले वर्ष के अधूरे कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।
इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक गहलोत, एमपीआरडीसी के जीएम श्री अनिल राठौर, समस्त जनपद सीईओ, सीडीपीओ, मुख्य नगरपालिका अधिकारी सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक के अंत में सार्वजनिक स्थलों पर पेयजल की सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।




