आरटीआई के ‘हथियार’ से डरा ग्राम पंचायत प्रशासन?

जानकारी देने के बजाय ‘कानून की गलत व्याख्या’ का सहारा!

देवरी (मझौली)

सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI), जिसे भ्रष्टाचार के खिलाफ जनता का सबसे बड़ा हथियार माना जाता है, उसे ग्राम पंचायत देवरी रजवई में ‘तकनीकी पेच’ फंसाकर कुंद करने की कोशिश की जा रही है। ताज़ा मामला ग्राम देवरी के जागरूक नागरिक सुनील सिंह द्वारा दायर की गई प्रथम अपील का है, जिसने पंचायत प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामला क्या है? ‘एक आवेदन, अनेक विषय’ का बहाना

बता दें कि सुनील सिंह ने धारा 6(1) के तहत पंचायत के विकास कार्यों और वित्तीय लेन-देन की जानकारी मांगी थी। नियमानुसार जानकारी देने के बजाय, पंचायत सचिव ने 13 मार्च 2026 को यह तर्क देते हुए सूचना देने से साफ इंकार कर दिया कि— “एक ही आवेदन में अनेक विषयों की जानकारी मांगी गई है।”

 क्या कहता है कानून? (कानूनी पड़ताल)

कोई पाबंदी नहीं: RTI एक्ट 2005 में कहीं भी यह नहीं लिखा है कि एक आवेदन में एक ही सवाल पूछा जा सकता है।

 CIC के निर्देश: केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) स्पष्ट कर चुका है कि यदि जानकारी एक ही विभाग (ग्राम पंचायत) से संबंधित है, तो उसे केवल इसलिए नहीं रोका जा सकता कि सवाल ज्यादा हैं।

 अवैध इंकार: कानून विशेषज्ञों के अनुसार, सचिव अधिकतम ‘अतिरिक्त शुल्क’ मांग सकते थे, लेकिन जानकारी देने से पूरी तरह मना करना धारा 7(1) का खुला उल्लंघन है।

अपीलार्थी सुनील सिंह ने जनपद पंचायत मझौली के प्रथम अपीलीय अधिकारी के समक्ष अपील दायर कर गंभीर आरोप लगाए हैं। अपील में कहा गया है कि:

पंचायत सचिव द्वारा 2019 के एक पुराने आदेश का गलत हवाला दिया जा रहा है।

  सभी प्रश्न ग्राम पंचायत के वित्तीय कार्यों से जुड़े हैं, जो एक ही विषय (पंचायत प्रबंधन) के अंतर्गत आते हैं।

 यह कृत्य सूचना छुपाने और पारदर्शिता को खत्म करने का प्रयास है।

  सचिव/PIO के विरुद्ध धारा 20 के तहत दंडात्मक कार्यवाही हो। 

15 दिनों के भीतर प्रमाणित जानकारी उपलब्ध कराई जाए।

 मामले की वित्तीय जांच (Audit) कराई जाए ताकि सच सामने आ सके।

अब गेंद प्रथम अपीलीय अधिकारी (CEO जनपद) के पाले में है। क्या प्रशासन अपने ही मातहतों की ‘मनमानी’ पर लगाम लगाएगा? या फिर सूचना के अधिकार का गला इसी तरह घोंटा जाता रहेगा?

“हमारा उद्देश्य सिस्टम में पारदर्शिता लाना है। अगर नियम और कानून केवल कागजों तक सीमित रहेंगे, तो जनता का भरोसा उठ जाएगा। हम इस लड़ाई को राज्य सूचना आयोग तक ले जाएंगे

सुनील सिंह (अपीलार्थी)

✍️ विशेष रिपोर्ट: मझौली दर्पण न्यूज टीम

(खबर जो हकीकत दिखाए)

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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