भोपाल-इंदौर में प्रस्तावित मेट्रोपोलिटन क्षेत्र और समीपवर्ती क्षेत्रों व राजमार्गों का घनत्व बढ़ाएं।
भोपाल
राजमार्गों का घनत्व राष्ट्रीय स्तर तक ले जाने के लिए विजन डॉक्यूमेंट बनाएं। शहरी विकास विभाग की एकीकृत नीति में PWD को भी शामिल किया जाए। अधोसंरचना विकास में पर्यावरण का ध्यान रखा जाए। ग्रीन बिल्डिंग संकल्पना पर कार्य करें। एक्सप्रेस वे बनाए जाएं।
दो वर्ष की उपलब्धियां- – प्रदेश में 12 हजार किमी सड़क निर्माण, उन्नयन और सुदृढ़ीकरण का रिकॉर्ड।
– वित्तीय वर्ष 2024–25 में 99% तक वित्तीय लक्ष्य प्राप्त।
– ‘लोक पथ’ ऐप के माध्यम से 12,212 शिकायतों में से 12,166 (99.6%) शिकायतों का निवारण।
– जबलपुर में प्रदेश के सबसे लंबे 6.9 किमी एलिवेटेड कॉरिडोर एवं भोपाल में 2.73 किमी अम्बेडकर फ्लाईओवर और 15.1 किमी लंबा श्यामा प्रसाद मुखर्जी नगर मार्ग शहरी कॉरिडोर का निर्माण।
– 3 नए मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य पूर्ण।
– 136 विद्यालय भवनों का निर्माण पूर्ण।
– केंद्रीय सहायता से 421 स्वीकृत सड़कों में से 378 कार्य पूर्ण हुए और 18 पुलों का निर्माण प्रगतिरत।
– प्रदेश में 506 “लोक कल्याण सरोवर” का निर्माण।
–पीएम गतिशक्ति आधारित जीआईएस मास्टर प्लान का क्रियान्वयन।
– लोक परियोजना प्रबंधन प्रणाली विकसित कर सभी परियोजनाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एकीकृत किया।
– लोक निर्माण सर्वे ऐप के माध्यम से सभी सड़कों, पुलों और भवनों का जियो-मैपिंग पूर्ण।
– विभागीय भवनों में सौर ऊर्जा अपनाकर 10 भवनों में 269 KW क्षमता के प्लांट लगाए गए और 689 भवनों में 6.5 MW क्षमता की स्थापना।
– सड़क किनारे 2.57 लाख पौधे लगाए गए।
आगामी तीन वर्ष की कार्ययोजना– पहली बार राज्य वित्त पोषित एक्सप्रेस वे मॉडल के तहत हाई-स्पीड कॉरिडोर विकसित होंगे।
– उज्जैन, सिंहस्थ-2028 के लिए 52 प्रमुख कार्यों पर ₹12 हज़ार करोड़ व्यय कर धार्मिक पर्यटन, आस्था स्थलों और शहरी कनेक्टिविटी को सुदृढ़ किया जाएगा।
– प्रदेश में 6-लेन एवं 4-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का निर्माण।
– एनएचएआई के सहयोग से सतना–चित्रकूट, रीवा–सीधी, बैतूल–खंडवा–इंदौर जैसे राष्ट्रीय महत्व के हाईवे का विस्तार होगा।
– अगले तीन वर्षों में 600 नए “लोक कल्याण सरोवर” का निर्माण।
– निर्माण कार्यों की गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली को और सख्त किया जाएगा।
– शहरी क्षेत्रों में नए आरओबी, फ्लाईओवर, बायपास और स्मार्ट कॉरिडोर विकसित




